ईरान ने क्या कहा?
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सिक्योरिटी काउंसिल को संदेश भेजकर बताया है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का प्लान शेयर कर रहा है। ईरान ने होर्मुज को खोलने के साथ कुछ शर्तें भी लगाई हैं, जिनके तहत जिन जहाजों को गैर-शत्रुतापूर्ण (Non-Hostile) माना जाता है, उन्हें यहां से गुजरने की अनुमति दी जा सकती है। यह संदेश ईरान के नए गठबंधन परामर्शी इब्राहिम रईसी द्वारा शेख अब्दुल्ला बिन अब्दलaziz अल सऊद को सौंपे गए थे।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण नौवहन मार्गों में से एक है, ईरान के पश्चिमी किनारे पर स्थित है। यह स्ट्रेट मध्य पूर्व में तेल और गैस की सबसे बड़ी आपूर्ति करने वाले देशों के बीच एक महत्वपूर्ण पुल है, जिसमें सऊदी अरब, ईरान, इराक और कुवैत शामिल हैं। मध्य पूर्व देश ईरान और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव की भयावहता के बावजूद, यह मार्ग दुनिया के सभी क्षेत्रों में तेल और गैस की आपूर्ति का मुख्य स्रोत है।
कौन से जहाज प्रभावित हैं?
मंगलवार को भारत सरकार की ओर से होर्मुज के रास्ते तेल और गैस की सप्लाई पर बड़ा अपडेट दिया गया है। शिपिंग, वॉटरवेज और पोर्ट्स मिनिस्ट्री के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश सिन्हा ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के वेस्ट साइड 20 भारतीय जहाज हैं, जो चेकपॉइंट को पार करने के लिए तैयार हैं। इन जहाजों में से अधिकांश तेल और रसायनों की आपूर्ति करने के लिए जा रहे हैं। भारत सरकार ने हाल ही में चीन के साथ गैस प्रोजेक्ट को लेकर समझौता किया है जो कि होर्मुज के माध्यम से ही होगा।
क्या है ईरान की शर्त?
ईरान ने कहा है कि जहाजों को गुजरने के लिए ईरानी अधिकारियों के साथ तालमेल बैठाने और तय किए गए सेफ्टी प्रोटोकॉल करने की जरूरत होगी। अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों पर प्रतिबंध लागू रहेगा। ईरान ने यह भी कहा है कि वह केवल इज़राइल और अमेरिका के जहाजों पर ही प्रतिबंध लगाएगा, जिनके पास भेद्यता के बारे में सबूत होंगे।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव
अमेरीका और ईरान के बीच तनाव कई महीनों से बढ़ रहा है। अमेरिका ने ईरान की कार्बनयुक्त पलटन (Fuel Oil Tanker) वारस को पकड़ने के बाद, जो कि संयुक्त अरब अमीरात से मिस्र के लिए जा रहा था, ईरान ने इसे छोड़ने का फैसला किया था। अमेरिका ने ईरानी नेवी पर हमले करने की धमकी भी दी है। ईरान ने भी इस हमले की जिम्मेदारी ले ली है।
भारत और ईरान के बीच का संबंध
भारत और ईरान दोनों ही मध्य पूर्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले देश हैं। भारत ने हाल ही में ईरान के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत दोनों देशों के बीच गैस की आपूर्ति में वृद्धि होगी। भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह को विकसित करने में भी मदद करने का फैसला किया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का ईरान का कदम महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ ही कुछ शर्तें भी लगाई हैं। यह कदम मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। भारतीय जहाजों पर प्रतिबंध से तेल और गैस की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। यह समय संयुक्त राष्ट्र सिक्योरिटी काउंसिल को बैठक करने और भारत और ईरान के बीच तनाव को कम करने के लिए कदम उठाने का है।
