दुनिया भर में ऊर्जा संकटः कैसे भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और अन्य देश निपट रहे हैं

दुनिया भर में ऊर्जा संकट एक बड़ा मुद्दा हो गया है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण हालात और गंभीर होते जा रहे हैं।

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भारत की कोशिशें

भारत मौजूदा ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति अपना रहा है। सरकार ने तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाकर रूस और अन्य देशों से आपूर्ति बढ़ाई है, ताकि किसी एक क्षेत्र (मध्य पूर्व) पर निर्भरता कम हो सके। घरेलू स्तर पर इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देकर सालाना 4.5 करोड़ बैरल तेल की बचत की जा रही है। साथ ही, रिफाइनिंग क्षमता विस्तार और ‘इकोनॉमिक स्टेबलाइजेशन फंड’ जैसे ठोस कदमों से भारत वैश्विक सप्लाई बाधाओं और कीमतों के उतार-चढ़ाव को झेलने में सक्षम हुआ है।

पाकिस्तान की कार्रवाई

पाकिस्तान में सरकारी कर्मचारियों के लिए 4 दिन का वर्क वीक लागू किया गया है और सरकारी विभागों के लिए ईंधन 50% कम कर दिया गया है। वहीं, म्यांमार में गाड़ियों के नंबर के आधार पर पेट्रोल दिया जा रहा है और कई पेट्रोल पंप बंद हो चुके हैं। पाकिस्तान सरकारी कर्मचारियों के लिए 4 दिन का वर्क वीक लागू करने में संकल्पित है, जिससे काम की गुणवत्ता में सुधार हो सके और ईंधन की बचत हो सके।

श्रीलंका की सख्ती

श्रीलंका में स्कूल, कॉलेज और गैर-जरूरी सरकारी दफ्तरों के लिए छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं और निजी वाहनों के लिए हर हफ्ते 15 लीटर पेट्रोल की सीमा तय की गई है। श्रीलंका ने कठोर कदम उठाकर स्कूलों और सरकारी दफ्तरों के लिए छुट्टियां घोषित की, जिससे ईंधन की खपत पर नियंत्रण किया जा सके।

अभी क्या है

दुनिया भर में ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है। यह संकट मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण हो रहा है। कई देशों ने सख्त कदम उठाकर ईंधन की बचत के लिए छुट्टियां घोषित की हैं और वर्क फ्रॉम होम का आदेश दिया है।

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