रोम में गूंजा भारत का नाम, PM मोदी को मिला सर्वोच्च सम्मान
इटली की राजधानी रोम में विश्व के कृषि विशेषज्ञों और नेताओं की मौजूदगी में भारत के लिए एक गौरवशाली क्षण देखने को मिला। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने अपने सबसे प्रतिष्ठित सम्मान, एग्रीकोला मेडल, के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम की घोषणा की। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच FAO के महानिदेशक डॉ. क्यू डोंग्यू ने यह मेडल पीएम मोदी को प्रदान किया। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, यह समारोह 20 मई, 2026 को FAO के मुख्यालय में आयोजित किया गया था। इस पुरस्कार को पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का सम्मान माना जा रहा है, जिसके तहत भारत ने न केवल अपनी 140 करोड़ की आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की है, बल्कि दुनिया के लिए एक मिसाल भी कायम की है। यह सम्मान भारत के करोड़ों ‘अन्नदाताओं’ के अथक परिश्रम को भी समर्पित है।
क्या है FAO एग्रीकोला मेडल और क्यों है यह इतना खास?
FAO एग्रीकोला मेडल कोई साधारण पुरस्कार नहीं है। यह संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। यह उन राष्ट्राध्यक्षों या प्रमुख हस्तियों को दिया जाता है जिन्होंने खाद्य सुरक्षा, गरीबी उन्मूलन और कृषि विकास के क्षेत्र में असाधारण और परिवर्तनकारी योगदान दिया हो।
सम्मान का इतिहास और महत्व
इस मेडल की स्थापना उन वैश्विक नेताओं को पहचानने के लिए की गई थी जिनकी नीतियां और पहल करोड़ों लोगों के जीवन से भुखमरी को मिटाने में सफल होती हैं। यह केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि किसी देश ने कृषि के माध्यम से अपने भविष्य को सुरक्षित करने में असाधारण सफलता हासिल की है। इस पुरस्कार का मिलना किसी भी देश के लिए वैश्विक मंच पर एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है, जो उसकी कृषि नीतियों की सफलता पर मुहर लगाता है।
किन वजहों से PM मोदी के नेतृत्व को मिला यह सम्मान?
यह पुरस्कार केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि पिछले एक दशक में भारत में हुए कृषि ों और खाद्य सुरक्षा की दिशा में उठाए गए क्रांतिकारी कदमों का परिणाम है। FAO ने विशेष रूप से कुछ क्षेत्रों में भारत की प्रगति को सराहा है, जो इस सम्मान का आधार बने।
खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय
पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों को छुआ है। ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ जैसी योजनाओं के माध्यम से कोरोना महामारी जैसे संकट के समय में भी 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त अनाज सुनिश्चित किया गया। इसने दुनिया के सामने एक ऐसा मॉडल पेश किया, जहां इतनी बड़ी आबादी को खाद्य असुरक्षा से बचाया जा सकता है। भारत की यह सफलता वैश्विक खाद्य संकट से जूझ रहे कई देशों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनी है।
प्राकृतिक खेती और ‘अन्नदाता’ का सशक्तिकरण
ट्वीट में भी इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत ने प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को एक जन-आंदोलन बनाने की दिशा में काम किया है। रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और भूमि की उर्वरता को बचाने के लिए उठाए गए कदमों ने FAO का ध्यान खींचा। इसके साथ ही, ‘पीएम-किसान सम्मान निधि’ जैसी योजनाओं के माध्यम से करोड़ों छोटे किसानों को सीधी वित्तीय सहायता प्रदान की गई, जिससे उनका सशक्तिकरण हुआ और वे कृषि में नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित हुए।
तकनीक और नवाचार को बढ़ावा
ड्रोन तकनीक का उपयोग, डिजिटल लैंड रिकॉर्ड्स, और किसानों के लिए ई-मार्केटप्लेस (e-NAM) जैसे तकनीकी हस्तक्षेपों ने कृषि को आधुनिक बनाया है। इन कदमों से न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में भी मदद मिली है। FAO ने माना है कि तकनीक का ऐसा जमीनी स्तर पर उपयोग विकासशील देशों के लिए एक बेहतरीन उदाहरण है।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख और भविष्य की राह
यह सम्मान ऐसे समय में मिला है जब दुनिया जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीतिक तनावों के कारण खाद्य संकट की चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में, भारत का कृषि मॉडल एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। इस पुरस्कार से वैश्विक मंच पर भारत की साख और मजबूत हुई है। यह इस बात का प्रतीक है कि भारत अब केवल खाद्य उत्पादक ही नहीं, बल्कि कृषि और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान भारत को वैश्विक खाद्य नीतियों को आकार देने में एक बड़ी भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करेगा।
