क्या है Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) Bill, 2025?
भारत सरकार का यह महत्वाकांक्षी विधेयक ग्रामीण विकास के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। वर्ष 2025 में प्रस्तावित इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में ‘रोजगार‘ और ‘आजीविका’ के अवसरों को एक कानूनी सुरक्षा कवच प्रदान करना है। इस मिशन के तहत, ग्रामीण भारत के उन लाखों परिवारों को लक्षित किया जाएगा, जो अभी भी पारंपरिक कृषि और असंगठित मजदूरी पर निर्भर हैं। विधेयक में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि इसका कार्यान्वयन पूरी तरह से तकनीक-आधारित होगा, ताकि बिचौलियों की भूमिका को समाप्त किया जा सके और सीधे लाभ हस्तांतरण (DBT) की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
इस बिल की चर्चा वर्तमान में न केवल राजनीतिक गलियारों में है, बल्कि यह Google पर भी एक चर्चित विषय बना हुआ है। ‘ssa’ (Sarva Shiksha Abhiyan) के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार योजनाओं के एकीकरण को लेकर जो विमर्श चल रहा है, उसमें यह बिल एक महत्वपूर्ण कड़ी की तरह देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि ‘Viksit Bharat’ का लक्ष्य तब तक अधूरा है, जब तक कि ग्रामीण भारत की आजीविका सुरक्षित और सशक्त न हो।
डिजिटलाइजेशन और तकनीक का एकीकरण
इस प्रस्तावित कानून की सबसे बड़ी विशेषता इसकी तकनीकी संरचना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि Gramin mission के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ब्लॉकचेन तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग किया जाएगा। इससे हर एक श्रमिक का डेटाबेस रियल-टाइम में अपडेट होगा। बिल के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास है कि किसी भी कार्यस्थल पर देरी से भुगतान न हो।
तकनीक के उपयोग से ग्रामीण स्तर पर चल रही विभिन्न योजनाओं में दोहराव को रोका जा सकेगा। यह विधेयक न केवल रोजगार प्रदान करने तक सीमित है, बल्कि यह कौशल विकास (skill development) को भी रोजगार गारंटी से जोड़ता है। सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट है: केवल काम देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि काम के साथ-साथ श्रमिकों की उत्पादकता बढ़ाना और उन्हें बेहतर भविष्य की ओर ले जाना अनिवार्य है।
पारदर्शिता और जवाबदेही का नया ढांचा
ग्रामीण रोजगार योजनाओं में अक्सर भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलती रही हैं। इस विधेयक के माध्यम से ‘जवाबदेही’ को कानूनी रूप दिया जा रहा है। यदि किसी अधिकारी द्वारा समय पर कार्य आवंटन या भुगतान में देरी होती है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। यह विधेयक प्रशासनिक मशीनरी को और अधिक संवेदनशील बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।
विधेयक के प्रावधानों के तहत एक ‘ग्रीवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म’ (शिकायत निवारण तंत्र) स्थापित किया जाएगा, जो सीधे तौर पर केंद्र सरकार की निगरानी में होगा। यह तंत्र ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक फैलेगा, जिससे ग्रामीण नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा।
विपक्ष और सिविल सोसाइटी की भूमिका
Dainik Bhaskar की रिपोर्ट बताती है कि आगामी संसदीय सत्र में इस विधेयक को पेश किया जाएगा। इस दौरान राजनीतिक दलों के बीच इस पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है। जहां एक ओर विपक्ष ने कार्यान्वयन में संभावित चुनौतियों पर सवाल उठाए हैं, वहीं सिविल सोसाइटी के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे सही भावना से लागू किया गया, तो यह ग्रामीण भारत के चेहरे को बदल सकता है।
विपक्ष का तर्क है कि ‘Guarantee’ शब्द के निहितार्थ व्यापक हैं। यदि सरकार रोजगार देने की गारंटी ले रही है, तो उसे बजट आवंटन में भी स्पष्टता रखनी होगी। वहीं, सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता की कमी को एक बड़ी बाधा के रूप में चिन्हित किया है। इन विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक तो अच्छी है, लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीक का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम की आवश्यकता होगी।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण
इस कानून के पारित होने के बाद भारत की ग्रामीण विकास नीतियों पर इसके दूरगामी परिणाम होंगे। सबसे पहले, यह ग्रामीण-शहरी पलायन को रोकने में मदद करेगा। यदि गांवों में ही रोजगार की गारंटी मिलेगी और आजीविका के साधन सुलभ होंगे, तो श्रमिकों को बड़े शहरों की ओर रुख करने की आवश्यकता कम हो जाएगी।
इसके अलावा, महिला सशक्तिकरण के दृष्टिकोण से भी यह एक बड़ा कदम है। इस मिशन के तहत महिला समूहों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को रोजगार कार्यों के साथ जोड़कर उन्हें सीधे आर्थिक मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जाएगा। यह सामाजिक परिवर्तन का एक ऐसा मॉडल होगा जो अन्य विकासशील देशों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।
अंत में, ‘Viksit Bharat’ का सपना तभी साकार होगा जब भारत का हर नागरिक, चाहे वह सुदूर गांव में ही क्यों न रहता हो, विकास की प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा बने। यह विधेयक उसी दिशा में एक ठोस और साहसिक प्रयास है, जिसे संसद की मंजूरी का इंतजार है। 9 जून 2026 की यह ताजा जानकारी स्पष्ट करती है कि सरकार आने वाले समय में ग्रामीण उत्थान को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखने जा रही है।
