सहकारी संघवाद और ‘विकसित भारत‘ का विजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित NITI Aayog की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक भारतीय राजनीति और शासन व्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर साबित हुई है। इस बैठक में प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत तभी विकसित हो सकता है जब उसके राज्य विकसित हों। “सहकारी संघवाद” (Cooperative Federalism) की भावना को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों को एक साथ मिलकर काम करना होगा ताकि देश के हर कोने तक विकास की लहर पहुँच सके।
प्रधानमंत्री ने इस बात को दोहराया कि नीति आयोग केवल एक संस्था नहीं है, बल्कि यह केंद्र और राज्यों के बीच एक सेतु का कार्य करती है। इस 11वीं बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाना था। इसके लिए प्रधानमंत्री ने ‘टीम इंडिया’ के दृष्टिकोण को अपनाने का आह्वान किया, जिसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल होकर देश के विकास के लिए सामूहिक निर्णय लें। यह बैठक न केवल नीतिगत चर्चाओं का मंच बनी, बल्कि इसने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एक संयुक्त रणनीति की आधारशिला भी रखी।
आर्थिक विकास की दिशा में राज्यों की भूमिका
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों से अपील की कि वे अपने राज्यों की विकास नीतियों को राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ जोड़ें। उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Competitive Federalism) होनी चाहिए, जिससे निवेश को आकर्षित करने और बेहतर शासन मॉडल बनाने में मदद मिले। विकास की इस यात्रा में राज्यों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब राज्य आर्थिक रूप से सशक्त होंगे, तभी भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।
आर्थिक विकास के साथ-साथ, इस बैठक में निर्यात को बढ़ावा देने, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को सशक्त बनाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भागीदारी बढ़ाने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि हर राज्य को अपने विशिष्ट उत्पादों (One District One Product) को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने के लिए रणनीति बनानी चाहिए। इससे न केवल स्थानीय रोजगार बढ़ेगा, बल्कि देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
सामाजिक और बुनियादी ढांचे में सुधार पर चर्चा
बैठक का एक बड़ा हिस्सा बुनियादी ढांचे के विकास और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर केंद्रित रहा। पीएम गतिशक्ति योजना के माध्यम से लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने और परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने की बात कही गई। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में राज्यों के बेहतर प्रदर्शन पर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि “विकसित भारत” का अर्थ केवल आर्थिक समृद्धि नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक के जीवन स्तर में सुधार और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी भी है।
बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि भारत की विकास यात्रा में तकनीक का उपयोग अनिवार्य है। डिजिटल इंडिया और एआई (Artificial Intelligence) के माध्यम से शासन को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के प्रयासों को और अधिक विस्तार देने की आवश्यकता है। राज्यों को सलाह दी गई कि वे अपने प्रशासन में नई तकनीकों का समावेश करें ताकि आम जनता तक सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के पहुँच सके।
कृषि क्षेत्र और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां
कृषि क्षेत्र में सुधार इस बैठक का एक अनिवार्य विषय था। प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर चर्चा की। खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना भी इस एजेंडे में शामिल था। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों को देखते हुए सस्टेनेबल डेवलपमेंट और हरित ऊर्जा (Green Energy) के प्रति राज्यों की प्रतिबद्धता पर बल दिया गया। जल संरक्षण और ‘कैच द रेन’ जैसे अभियानों को जन-आंदोलन बनाने की आवश्यकता जताई गई।
बैठक के परिणाम और भविष्य का मार्ग
NITI Aayog की इस बैठक के परिणाम भारत के विकास पथ को एक नई दिशा देने वाले साबित होंगे। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में लिए गए निर्णय और राज्यों द्वारा दिए गए सुझावों को मिलाकर एक एकीकृत योजना तैयार की जाएगी। यह बैठक यह दर्शाती है कि भारत की विकास की नींव “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र पर टिकी है।
बैठक के अंत में प्रधानमंत्री ने राज्यों को आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार उनकी हर संभव सहायता करने के लिए तैयार है। उन्होंने राज्यों से अपनी वित्तीय स्थिति को संतुलित रखने और उत्पादक निवेश पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। 11वीं गवर्निंग काउंसिल की यह बैठक इस विश्वास के साथ संपन्न हुई कि सामूहिक प्रयासों से भारत आने वाले दशकों में दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनेगा और अपने नागरिकों को एक उज्ज्वल भविष्य प्रदान करेगा।
वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती साख
बैठक के दौरान यह भी चर्चा की गई कि किस प्रकार भारत की आंतरिक नीतियां उसकी वैश्विक छवि को प्रभावित करती हैं। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि भारत की विकास गाथा को दुनिया बड़े चाव से देख रही है। जब केंद्र और राज्य मिलकर एक स्वर में बात करते हैं, तो इससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच विश्वास बढ़ता है। “विकसित भारत” का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए भारत को अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ानी होगी और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) की रैंकिंग में और सुधार करना होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास की इस दौड़ में कोई भी राज्य पीछे नहीं रहना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) और ब्लॉक स्तर पर विकास की गति को तेज करने की बात कही। जब पिछड़े क्षेत्रों का विकास होगा, तभी क्षेत्रीय असमानता कम होगी और समावेशी विकास सुनिश्चित हो सकेगा। यह बैठक सामूहिक नेतृत्व और साझा उत्तरदायित्व की भावना का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश करती है।
