ILC114 Geneva: भारत ने लेबर रिफॉर्म्स को दी नई दिशा, वैश्विक मंच पर बढ़ाया मान

जेनेवा में आयोजित 114वें इंटरनेशनल लेबर कॉन्फ्रेंस (ILC114) के दूसरे दिन भारत ने अपने श्रम सुधारों के एजेंडे को वैश्विक स्तर पर मजबूती से रखा है। इस दौरान भारत के श्रम मंत्री ने सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण को लेकर महत्वपूर्ण द्विपक्षीय चर्चाओं में हिस्सा लिया।

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जेनेवा में भारत की मजबूत उपस्थिति

11 जून, 2026 को Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के अनुसार, स्विट्जरलैंड के जेनेवा में चल रही 114वीं इंटरनेशनल लेबर कॉन्फ्रेंस (ILC114) में भारत का प्रतिनिधित्व अत्यंत प्रभावशाली रहा है। यह आयोजन वैश्विक श्रम बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन, भारत के श्रम मंत्री ने न केवल देश का ‘प्लेनरी स्टेटमेंट’ दिया, बल्कि ‘न्यू लेबर कोड्स’ पर आयोजित उच्च स्तरीय संवाद में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। भारत द्वारा उठाए गए इन कदमों का उद्देश्य न केवल घरेलू श्रम कानूनों को आधुनिक बनाना है, बल्कि वैश्विक स्तर पर सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाकर एक समावेशी और सुरक्षित कार्य वातावरण तैयार करना भी है।

ILO Director-General Gilbert Houngbo के साथ चर्चा

इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के दौरान भारत के श्रम मंत्री ने ILO के Director-General Gilbert Houngbo के साथ विस्तृत वार्ता की। इस चर्चा का मुख्य केंद्र सहयोग के नए क्षेत्रों को तलाशना था। दोनों दिग्गजों के बीच विशेष रूप से कार्यबल के कौशल विकास (Skills Development) और व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training) को लेकर भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। Gilbert Houngbo ने भारत के सुधारवादी दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि भारत के अनुभव अन्य विकासशील देशों के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य कर सकते हैं। यह बैठक भारत और ILO के बीच भविष्य के गहरे सहयोग की नींव रखने वाली साबित होगी।

द्विपक्षीय वार्ता और वैश्विक प्रभाव

सम्मेलन के दौरान केवल ILO नेतृत्व ही नहीं, बल्कि विभिन्न देशों के श्रम मंत्रियों के साथ भारत की द्विपक्षीय बैठकें भी चर्चा का विषय रहीं। इन बैठकों का उद्देश्य आपसी सहयोग को बढ़ावा देना और श्रम सुधारों के क्षेत्र में साझा चुनौतियों का समाधान खोजना था। भारत ने स्पष्ट रूप से व्यक्त किया है कि नई तकनीकों और बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप श्रम कानूनों में लचीलापन और सुरक्षा का संतुलन आवश्यक है। इन चर्चाओं का प्रभाव न केवल भारत की घरेलू नीतियों पर पड़ेगा, बल्कि यह वैश्विक श्रम बाजार में श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए एक नई नियमावली तैयार करने में भी मददगार साबित होगा।

कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा पर जोर

भारत ने इस मंच पर ‘डिसेंट वर्क’ (Decent Work) यानी ‘सभ्य कार्य’ के एजेंडे को आगे बढ़ाया है। सरकार का मुख्य ध्यान सामाजिक सुरक्षा के दायरे को व्यापक बनाने पर है। विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए नई नीतियों का खाका तैयार किया जा रहा है, जिसे वैश्विक स्तर पर सराहा जा रहा है। भारत में हो रहे लेबर रिफॉर्म्स, जो ‘न्यू लेबर कोड्स’ के तहत लाए गए हैं, वे पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण पेश कर रहे हैं कि कैसे तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता लाई जा सकती है।

सम्मेलन की निरंतरता और उम्मीदें

यह कॉन्फ्रेंस आगामी दिनों में भी जारी रहेगी और इससे निकलने वाले परिणाम निश्चित रूप से अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों को प्रभावित करेंगे। भारत की भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह वैश्विक श्रम सुधारों के मामले में पीछे रहने के बजाय नेतृत्व करने की स्थिति में है। जेनेवा की इस यात्रा के बाद, भारत के श्रम मंत्रालय से उम्मीद है कि वह इन अंतरराष्ट्रीय अनुभवों के आधार पर देश में नई नीतियों का तेजी से क्रियान्वयन करेगा। इन प्रयासों का अंतिम लक्ष्य हर श्रमिक के लिए सम्मानजनक रोजगार और सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करना है। वैश्विक मंच पर भारत की यह सक्रियता देश की बढ़ती कूटनीतिक शक्ति का भी प्रतीक है।

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