चीन का अरुणाचल पर दावा जारी
चीन ने मंगलवार को एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा ठोकते हुए विवादित बयान दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’ (Zangnan) के नाम से पुकारते हैं और अपनी संप्रभुता के तहत इन स्थानों के नाम बदल सकते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ दिन पहले ही भारत ने चीन के ऐसे किसी भी प्रयास को सिरे से खारिज कर दिया था। इससे पहले रविवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन के इस कदम को झूठा और हकीकत से परे बताया था। भारत का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से उसका अविभाज्य अंग रहा है और रहेगा।
बार-बार नाम बदलने की कोशिशें
चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले 10 सालों में यह छठी बार है जब चीन ने इस क्षेत्र के स्थानों के नाम बदलने की सूची जारी की है। चीनी नागरिक मामलों के मंत्रालय ने सबसे पहले 2017 में अरुणाचल के छह स्थानों के फर्जी नाम जारी किए थे। इसके बाद, 2021 में 15 स्थानों की दूसरी सूची जारी की गई, और 2023 में 11 स्थानों के नामों वाली एक और सूची प्रकाशित हुई। चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता रहा है, जिसे भारत सिरे से खारिज करता है।
भारत का कड़ा रुख: नाम बदलने से हकीकत नहीं बदलती
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने चीन के इस कदम पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय भूमि के अंतर्गत आने वाले स्थानों को मनगढ़ंत नाम देने के चीन के किसी भी शरारती प्रयास को भारत पूरी तरह से खारिज करता है। जायसवाल ने जोर देकर कहा कि चीन के ये झूठे दावे और कोशिशें इस निर्विवाद वास्तविकता को नहीं बदल सकतीं कि अरुणाचल प्रदेश समेत ये सभी स्थान और क्षेत्र भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से थे, हैं और हमेशा रहेंगे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ऐसे कदम द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।
संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव का अंदेशा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि चीन की ऐसी कार्रवाइयां भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने की कोशिशों से ध्यान भटकाती हैं। उन्होंने चीन से ऐसे कार्यों से बचने का आग्रह किया जो संबंधों में नकारात्मकता पैदा करते हैं और दोनों देशों के बीच बेहतर समझ बनाने के प्रयासों को कमजोर करते हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद 2020 में भारत और चीन के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। पिछले डेढ़ सालों में, दोनों पक्षों ने संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन चीन की यह हरकतें इन प्रयासों पर पानी फेर सकती हैं।
चीन की पिछली कोशिशें
यह पहली बार नहीं है जब चीन ने अरुणाचल प्रदेश के नामों को बदलने की कोशिश की है। भारत ने पिछले साल मई में और अप्रैल 2024 में भी अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नाम बदलने पर कड़ा रुख अपनाया था। चीन के विदेश मंत्रालय ने 2017 में अरुणाचल प्रदेश के छह स्थानों के लिए आधिकारिक तौर पर नाम बदलने का पहला सेट जारी किया था। इसके बाद, 2021 में 15 स्थानों के नाम बदलने की एक और सूची सामने आई, और 2023 में 11 स्थानों के नामों वाली एक और सूची जारी की गई। चीन का यह लगातार रवैया भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति उसकी उपेक्षा को दर्शाता है।
भू-राजनीतिक तनाव का इतिहास
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और भू-राजनीतिक तनाव का एक लंबा इतिहास रहा है। 2020 में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्ते और भी खराब हो गए थे। हालांकि, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर बातचीत जारी है ताकि तनाव को कम किया जा सके और संबंधों को सामान्य बनाया जा सके। लेकिन चीन का यह ताजा बयान दर्शाता है कि वह अपनी पुरानी रणनीति पर ही कायम है और किसी भी तरह से भारत पर दबाव बनाने का मौका नहीं छोड़ना चाहता।
