1970 के दशक का तेल संकट क्या था?
अरब तेल उत्पादक देशों ने 1973 में बीच तैयारअमेरिका-ईरान– ईराने अमेरिका के>सीजफायर और संपत्ति की रिहाई की मांग”>प्रमुख शर्तें, लेबनान में सीजफायर और संपत्ति की रिहाई की मांग”>साथ वार्ता से पहले रखीसाथ वार्ताअमेरिका और उसके नेतृत्वाले देशों पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिससे तेल की क़ीमतें लगभग चार गुना बढ़ गईं। इससे वैश्विक आर्थिक और वित्तीय संकट शुरू हो गया, जिसका लंबे समय तक असर पड़ने वाला था।
हालिया तेल संकट में फ़िलहाल क्या हो रहा है?
अमेरिका और इसराइल के एक महीने पहले ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध शुरू करने के बाद से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से जहाज़ों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। इससे खाड़ी देशों से तेल, गैस और अन्य ज़रूरी चीज़ों की सप्लाई प्रभावित हुई है, जो आम तौर पर दुनिया के क़रीब पांचवें हिस्से (लगभग 20%) के तेल का निर्यात करते हैं।
क्या दुनिया 1970 के दशक से भी बदतर हालात की ओर बढ़ रही है?
शिपिंग एक्सपर्ट और मर्स्के पूर्व डायरेक्टर लार्स येनसेने बीबीसी से कहा कि हालिया तेल संकट 1970 के दशक के तेल संकट से भी बदतर हो सकता है। उन्होंने कहा कि जो तेल एक महीने से ज़्यादा पहले खाड़ी से निकला था, वही अभी दुनिया की रिफ़ाइनरियों तक पहुंच रहा है और यह सप्लाई जल्द ही रुक जाएगी।
क्या होगा अगर तेल संकट बढ़ता है?
अगर तेल संकट बढ़ता है, तो दुनिया को बहुत ज़्यादा ऊर्जा लागत का सामना करना पड़ेगा, सिर्फ़ इस संकट के दौरान नहीं, बल्कि इसके ख़त्म होने के बाद भी 6 से 12 महीने तक। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिसमें मंदी, बेरोज़गारी और सामाजिक अशांति वार्ता के बीच क्याशांति वार्ताशांति शामिल हो सकती है।
