पाकिस्तान में शांति वार्ता से पहले अमेरिका ने मानी ईरान की यह अहम शर्त: हॉर्मुज खुलने की बढ़ी उम्मीदें?

अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता से पहले एक बड़ी खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान की एक प्रमुख शर्त पर अपनी सहमति दे दी है, जिसके तहत कतर और अन्य बैंकों में जमा ईरानी संपत्ति जारी की जाएगी। ईरान ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के बीच किसी समझौते तक पहुंचने की दिशा में अमेरिका की गंभीरता का संकेत बताया है। यदि ईरान पर लगे प्रतिबंध हटते हैं, तो सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने की संभावनाएं भी बढ़ जाएंगी।

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इस्लामाबाद में ऐतिहासिक शांति वार्ता की तैयारी

अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की धरती पर सीधी बातचीत की तैयारियां जोरों पर हैं। 6 सप्ताह तक चले युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से दोनों देशों के वरिष्ठ नेता इस समय पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मौजूद हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सूत्रों ने शनिवार, 11 अप्रैल को बताया कि अमेरिका ने ईरान की एक महत्वपूर्ण शर्त मान ली है। यह शर्त कतर और अन्य बैंकों में जमा ईरानी संपत्ति को जारी करने से संबंधित है, जिसे ईरान ने शांति समझौते की दिशा में एक गंभीर कदम के तौर पर देखा है।

ईरान की संपत्ति जारी करने पर सहमति

ईरान लंबे समय से अपनी उन संपत्तियों को जारी करने की मांग कर रहा था, जो विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बैंकों में प्रतिबंधों के कारण अटकी हुई हैं। अमेरिका द्वारा इस शर्त को मानने के बाद, ईरान को उम्मीद है कि इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता सफल होगी और दोनों देशों के बीच तनाव कम हो पाएगा। ईरान का मानना है कि इस कदम से अमेरिका ने बातचीत के माध्यम से किसी समझौते पर पहुंचने की अपनी मंशा का स्पष्ट संकेत दिया है। यदि ईरान पर लगे प्रतिबंध पूरी तरह से हट जाते हैं, तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण और युद्ध में हुए नुकसान के मुआवजे की उसकी मांगों को भी बल मिल सकता है।

दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों का पाकिस्तान आगमन

ईरान और अमेरिका के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच चुके हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। उनके साथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल के दो विमान इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी वायुसेना के एयरबेस पर पहुंचे, जहां पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार ने उनका स्वागत किया। वहीं, ईरान का प्रतिनिधिमंडल भी शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंचा। इस दल का नेतृत्व वहां के संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराकची कर रहे हैं।

45 साल बाद सर्वोच्च स्तरीय बातचीत

वर्ष 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से यह अमेरिका और ईरान के बीच अब तक की सबसे उच्च-स्तरीय बातचीत मानी जा रही है। अगर दोनों प्रतिनिधिमंडल आमने-सामने बैठकर सीधे संवाद करते हैं, तो यह 2015 के बाद उनकी पहली सीधी बातचीत होगी। ज्ञात हो कि 2015 में दोनों देशों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक समझौता किया था, लेकिन तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2018 में उस समझौते को रद्द कर दिया था। इसी साल, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने दोनों देशों के अधिकारियों के बीच आगे किसी भी सीधी बातचीत पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसने वर्तमान वार्ता को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है।

लेबनान और प्रतिबंधों पर ईरान की शर्तें

वार्ता से पहले, ईरान ने लेबनान और प्रतिबंधों के मुद्दे पर ठोस प्रतिबद्धताओं के बिना बातचीत की संभावना पर संदेह व्यक्त किया था। ईरानी नेता कालिबफ ने सोशल मीडिया पर कहा है कि अमेरिका पहले ईरान की संपत्तियों से प्रतिबंध हटाने और लेबनान में युद्धविराम के लिए सहमत हो गया था। उन्होंने बताया कि मार्च में युद्ध शुरू होने के बाद से लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह लड़ाकों पर इजरायली हमलों में लगभग 2 हजार लोग मारे जा चुके हैं। कालिबफ ने स्पष्ट किया है कि जब तक ये वादे पूरे नहीं हो जाते, तब तक सीधी बातचीत शुरू नहीं होगी। हालांकि, इजरायल और अमेरिका ने यह स्पष्ट किया है कि लेबनान में चल रहा ऑपरेशन ईरान और अमेरिका के युद्ध विराम का हिस्सा नहीं है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और आगे की रणनीति

ईरान के सरकारी चैनल ने जानकारी दी है कि ईरान का प्रतिनिधिमंडल दोपहर के आसपास पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मिलकर संभावित बातचीत के समय और तरीके पर फैसला करेगा। ईरान के एक सीनियर नेता ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि पाकिस्तान ईरान की मांगों पर अमेरिका की शुरुआती प्रतिक्रिया देगा। यदि ईरान इस प्रतिक्रिया को स्वीकार कर लेता है, तो दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत शुरू हो पाएगी। अमेरिका ने ईरान की मांगों पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की है।

ट्रंप का बयान और अंतरराष्ट्रीय दबाव

इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट के जरिए अपनी राय साझा की है। उन्होंने कहा है कि “ईरानियों के जिंदा होने का एकमात्र कारण किसी सौदे पर बातचीत करना है।” ट्रंप ने आगे कहा कि “ईरान को शायद एहसास नहीं है कि उनके पास अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग का इस्तेमाल करके दुनिया से थोड़े समय के लिए जबरन वसूली करने के अलावा कोई और दांव नहीं है। आज उनके जिंदा होने का एकमात्र कारण बातचीत करना है।” ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की उम्मीदें बढ़ रही हैं, जो इस जटिल मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और विभिन्न दृष्टिकोणों को उजागर करता है।

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