ईरान संग बिना डील के अमेरिका ने क्यों छोड़ा इस्लामाबाद, जेडी वेंस ने किया खुलासा, कहा-‘ट्रंप बहुत खुश होंगे’

पाकिस्तान में शांति वार्ता फेल होने के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फ़ॉक्स न्यूज के "स्पेशल रिपोर्ट" में बताया कि ईरानी वार्ताकार समझौता नहीं कर पा रहे थे और उन्हें तेहरान में अतिरिक्त मंजूरी चाहिए थी। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी का ऐलान किया, जिससे तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका बढ़ी।

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शांति वार्ता के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति का बयान

पाकिस्तान में आयोजित इज़राइल‑ईरान शांति वार्ता विफल रहने के बाद, जेडी वेंस ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को बताया कि ईरान के प्रतिनिधियों को समझौता करने में कठिनाई आ रही थी। वेंस ने कहा, “मुझे लगता है कि ईरानी वार्ताकार समझौता करने में असमर्थ थे और उन्हें तेहरान में अन्य अधिकारियों की मंजूरी लेनी पड़ेगी।” इस बयान से पता चलता है कि ईरानी राजनयिकों के पास अपने समाधान को अंतिम रूप देने की स्वतंत्रता नहीं है।

ट्रंप का ईरान पर आर्थिक दबाव

वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर नाकेबंदी का आदेश दिया। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह कदम ईरान को परमाणु सामग्री हटाने और यूरेनियम संवर्धन को रोकने के लिए दबाव बनाएगा। उन्होंने कहा, “अगर ईरान इस दिशा में कदम नहीं उठाएगा, तो हम प्रतिबंधों को कड़ा करेंगे।” इस निर्णय से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ने की संभावना जताई गई है।

जेडी वेंस ने बताया आगे की संभावनाएँ

वेंस ने आगे कहा कि “अगर ईरान को एक सामान्य देश के रूप में माना जाए और उनकी अर्थव्यवस्था सामान्य हो जाए, तो ट्रंप बहुत खुश होंगे।” यह टिप्पणी ईरान की आर्थिक स्थिति को सामान्य करने की अमेरिकी इच्छा को दर्शाती है। हालांकि, वेंस ने इस बात का विवरण नहीं दिया कि ट्रंप किस हद तक खुश होंगे या किन शर्तों पर। उन्होंने भी कहा कि “अमेरिका के दबाव से कुछ सहमति बनी है और हम चाहते हैं कि ईरान हमारी दिशा में आगे बढ़े।”

अमेरिकी वार्ताकारों का दृष्टिकोण

उपराष्ट्रपति वेंस ने बताया कि अमेरिकी वार्ताकारों ने ईरानी पक्ष को स्पष्ट किया कि “यदि ईरान परमाणु सामग्री हटाता है और भविष्य में यूरेनियम संवर्धन को रोकता है, तो हमारे बीच शांति समझौता संभव हो सकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि “हमें लगता है कि अगले कदम ईरानियों को ही उठाने चाहिए, क्योंकि उन्होंने पहले ही कुछ प्रगति दिखाई है।” इस प्रकार, अमेरिकी पक्ष से यह स्पष्ट हुआ कि वे ईरान से ठोस कदमों की अपेक्षा कर रहे हैं।

ट्रंप ने कहा तेल कीमतों में असर

नक़ाबंदी के बाद, ट्रम्प ने कहा कि “शुरुआत में तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव देखी जा सकती है।” उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के संदर्भ में इस कदम को वैध बताया, लेकिन विशेषज्ञों ने प्रश्न उठाए कि क्या यह कदम समुद्री आवाज़ों के अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करेगा। कई देशों ने इस नाकेबंदी को “अस्थिरता उत्पन्न करने वाला” कहा और इज़राइल‑ईरान तनाव को लेकर आशंकाएँ बढ़ी हैं।

संबंधित रिपोर्ट एवं आगे का संदर्भ

यह घटनाक्रम कई अन्य समाचार स्रोतों में भी प्रकाशित हुआ है, जैसे कि ABP Live की “US Iran Peace Talk: तारीख तय… सबसे बड़ी शर्त मान गया ईरान!” तथा “डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा ईरान शांति वार्ता में सहयोग करेगा”। इन रिपोर्टों ने वही तथ्य दोहराए हैं: वार्ता में प्रगति का अभाव, अमेरिकी नाकाबंदी, और जेडी वेंस के बयान।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

बिल्कुल नयी शांति प्रक्रिया की आशा के बावजूद, ईरान, पाकिस्तान और अन्य मध्य‑पूर्वी देशों ने इस अमेरिकी कदम को “अत्यधिक प्रतिबंधात्मक” कहा। यूरोपीय संघ के विदेश मंत्री ने टिप्पणी की, “हमें सभी पक्षों को संवाद जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, न कि एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों से स्थिति को बिगाड़ना चाहिए।”

भविष्य में संभावित विकास

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान फॉर्मल मंजूरी प्राप्त कर लेता है और परमाणु सामग्री हटाने में सहयोग देता है, तो ट्रम्प और अमेरिकी प्रशासन के बीच यह समझौता संभव हो सकता है। वहीं यदि ईरान अपनी स्थिति में बदलाव नहीं करता, तो आगे की नाकाबंदी और आर्थिक प्रतिबंधों की संभावना बढ़ सकती है। इन सभी कारकों को देखते हुए, शांति वार्ता की दिशा और अमेरिकी नीतियों पर नज़र रखना आवश्यक होगा।

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