इजरायल और पाकिस्तान के बीच गहराता तनाव
इस्लामाबाद में चल रही ईरान और अमेरिका की बातचीत, जिसका उद्देश्य 8 अप्रैल को हुए अस्थायी युद्धविराम को स्थायी बनाना है, एक संवेदनशील समय पर हो रही है। इसी दौरान इजरायल ने पाकिस्तान पर अविश्वास व्यक्त किया है, खासकर उसकी मध्यस्थ की भूमिका पर। दूसरी ओर, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल के खिलाफ सार्वजनिक मंचों पर कड़ी टिप्पणी की है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस बढ़ते राजनीतिक घर्षण के परिणामस्वरूप, पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार अबसार आलम ने एक वीडियो संदेश जारी किया है, जिसमें उन्होंने इजरायल के साथ पाकिस्तान के संभावित सैन्य टकराव की चेतावनी दी है।
पाकिस्तानी पत्रकार अबसार आलम का बड़ा दावा
पत्रकार अबसार आलम ने अपने वीडियो में इजरायल की पिछली सैन्य कार्रवाइयों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इजरायल ने अब तक गाजा और लेबनान जैसे उन क्षेत्रों में बमबारी की है, जिनके पास प्रभावी सेना नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान के साथ हुए हालिया टकराव ने इजरायल को यह स्पष्ट कर दिया है कि ऐसी लड़ाई लड़ना उनके लिए कितना महंगा साबित हो सकता है। आलम ने चेतावनी दी कि अगर इजरायल पाकिस्तान से उलझता है, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा, ‘आज इजरायल हमारे रडार पर और हम इजरायल के रडार पर हैं।’ अबसार आलम ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इजरायल और पाकिस्तान के बीच क्या होता है, मानो ‘खूब गुजरेगी जब मिल बैठेंगे दीवाने दो।’
नेतन्याहू को अबसार आलम की सीधी चुनौती
अबसार आलम ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह पाकिस्तान से उलझना चाहते हैं तो उनका “स्वागत” है। उन्होंने नेतन्याहू को यह सोचने की सलाह दी कि अगर पाकिस्तान 80 साल से अपने से कई गुना बड़े देश भारत से लड़ रहा है, तो इजरायल की क्या हैसियत है। आलम ने पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के इस बयान का भी समर्थन किया कि इजरायल “नरसंहार” कर रहा है, क्योंकि उन्होंने गाजा और लेबनान में लगातार ऐसा किया है। यह टिप्पणी इजरायल के खिलाफ पाकिस्तान की ओर से एक मजबूत नैतिक और राजनीतिक रुख को दर्शाती है।
पाकिस्तान का इजरायल को कड़ा संदेश
अबसार आलम ने अपने बयान में इस बात पर भी प्रकाश डाला कि पाकिस्तान ने अपने लड़ाकू विमान ईरान और सऊदी अरब में भेजे हैं। यह कदम इस्लामाबाद में शांति वार्ता को खराब करने में लगे इजरायल के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। आलम ने कहा कि यह इजरायल के लिए एक सीधी चेतावनी है कि अगर वह पाकिस्तान से उलझता है, तो उसे “भारी पड़ जाएगा।” उन्होंने दोहराया कि अब इजरायल पाकिस्तान के रडार पर है और पाकिस्तान इजरायल के रडार पर है, जिससे आने वाले समय में दोनों देशों के बीच की स्थिति पर सबकी नजर रहेगी।
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की विवादित टिप्पणी
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने गुरुवार को अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इजरायल पर तीखा हमला बोला। आसिफ ने लिखा कि इजरायल ने पहले गाजा में लोगों को मारा, फिर ईरान और अब लेबनान में “खून खराबा” कर रहा है। उन्होंने इजरायल के गठन पर भी निशाना साधा और लिखा कि जिन लोगों ने यूरोपीय यहूदियों से छुटकारा पाने के लिए फिलिस्तीनी जमीन पर “इस कैंसर को भेजा”, वे दोजख में जलेंगे। यह टिप्पणी इजरायल के प्रति पाकिस्तान की सरकार के कड़े रुख को दर्शाती है और फिलिस्तीन के मुद्दे पर उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
नेतन्याहू कार्यालय की तीखी प्रतिक्रिया
ख्वाजा आसिफ के इस आपत्तिजनक पोस्ट पर इजरायल की ओर से तत्काल और तीखी प्रतिक्रिया आई। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने आसिफ के बयान को “बेहद आपत्तिजनक” करार दिया। कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इजरायल को मिटा देने की पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की मांग ऐसे देश के नहीं हो सकते, जो शांति के लिए एक “निष्पक्ष मध्यस्थ” होने का दावा करता हो। इस प्रतिक्रिया ने दोनों देशों के बीच की खाई को और चौड़ा कर दिया है और राजनयिक तनाव को बढ़ाया है।
इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता का महत्व
इजरायल और पाकिस्तान के बीच यह बढ़ती तनातनी ऐसे समय में हो रही है, जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेता एक महत्वपूर्ण वार्ता के लिए एकत्रित हो रहे हैं। अमेरिका की ओर से वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस शुक्रवार को पाकिस्तान की राजधानी पहुंचे हैं, जबकि ईरान से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ वार्ता में शामिल होने आए हैं। इन नेताओं के सामने ईरान और अमेरिका के बीच 8 अप्रैल को हुए अस्थायी युद्धविराम को बचाने की बड़ी चुनौती है। ऐसे में इजरायल और पाकिस्तान के बीच का यह तनाव क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नई चुनौतियां पेश कर सकता है, जिससे इस शांति वार्ता का महत्व और भी बढ़ जाता है।
