1. 5 लाख तक का ऑटो-सेटलमेंट
अब 5 लाख तक का दावा बिना किसी अप्रूवल के अपने आप सेटल हो जाएगा. सॉफ्टवेयर खुद-ब-खुद आपका डेटा चेक करेगा और पैसा सीधे आपके बैंक अकाउंट में आ जाएगा. पहले यह लिमिट सिर्फ 1 लाख रुपये थी. इस बदलाव से अब आपको पैसा प्राप्त करने के लिए अधिकतर प्रयास नहीं करने होंगे.
2. पैसा मिलने में कम समय
पहले पीएफ का पैसा आने में 7-15 दिनों का वक्त लगता था. कभी-कभी तो महीना भर लग जाता था. लेकिन अब नए सिस्टम के साथ क्लेम डालने के 3-4 दिनों में पैसा आपके खाते में आ जाएगा. इस बदलाव से पैसा प्राप्त करने में आपका समय कम हो जाएगा.
3. कागजी कार्यवाही खत्म
पहले क्लेम फॉर्म के साथ चेक की फोटो या बैंक पासबुक अपलोड करने की जरूरत पड़ती थी. EPFO 3.0 के साथ अगर आपका KYC (आधार, पैन और बैंक) अपडेटेड है तो सिस्टम अपने आप ही वेरिफाई कर लेगा. इस बदलाव से अब आपको कागजी कार्यवाही करने की जरूरत नहीं होगी.
4. कम रिजेक्शन
पहले पीएफ क्लेम छोटी-मोटी गलतियों की वजह से रिजेक्ट हो जाते थे, लेकिन EPFO 3.0 में ‘एरर करेक्शन’ सिस्टम बेहतर है. फॉर्म भरते वक्त ही आपको बता दिया जाएगा कि कहीं कोई गलती है या नहीं. इस बदलाव से अब आपको गलती से रिजेक्शन का खराब अनुभव नहीं होगा.
5. पूरी तरह से डिजिटल
EPFO 3.0 पूरी तरह से डिजिटल होने से आप अपने क्लेम का स्टेटस रियल-टाइम में ट्रैक कर पाएंगे. मानवीय दखलअंदाजी कम होने से भ्रष्टाचार कम होने के साथ-साथ देरी होने की गुंजाइश भी कम होगी. इस बदलाव से अब आपको अपने क्लेम का प्रबंधन करने के लिए ज्यादा कोशिश नहीं करनी होगी.
सेंट्रलाइज्ड पेंशन सिस्टम
EPFO 3.0 के तहत किए गए सबसे अहम बदलावों में से एक है सेंट्रलाइज्ड पेंशन पेमेंट सिस्टम (CPPS) की शुरुआत. सरकार ने बताया कि यह सिस्टम 1 जनवरी, 2025 से सभी EPFO दफ्तरों में पूरी तरह से लागू कर दिया गया है. अब पेंशन का भुगतान एक ही सेंट्रलाइज्ड जगह से प्रोसेस किया जाता है और इसे भारत भर में किसी भी शेड्यूल्ड बैंक की ब्रांच के जरिए दिया जा सकता है. इस पहल से हर महीने 70 लाख से ज्यादा पेंशनभोगियों को फायदा होता है.
