इस्लामाबाद में तैयार था समझौता
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का दावा है कि प्रस्तावित “इस्लामाबाद समझौता” (एमओयू) लगभग तैयार था और दोनों पक्ष अंतिम सहमति के बेहद करीब थे। उनका कहा है कि इन परिस्थितियों के चलते 21 घंटे तक चली गहन और मुश्किल बातचीत आखिरकार बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। तेहरान ने यह भी संकेत दिया है कि अगर बातचीत के दौरान शर्तों में लगातार बदलाव न किए जाते, तो यह डील संभव हो सकती थी।
आखिरी वक्त में बढ़ा तनाव
अराघची ने एक्स पर लिखा, “47 सालों में सबसे ऊंचे स्तर पर हुई गहरी बातचीत में, ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ अच्छी नीयत से बातचीत की। लेकिन जब ‘इस्लामाबाद एमओयू’ से बस कुछ इंच दूर थे, तो हमें गोलपोस्ट बदलने और ब्लॉकेड का सामना करना पड़ा। कोई सबक नहीं मिला। अच्छी नीयत से अच्छी नीयत पैदा होती है। दुश्मनी से दुश्मनी पैदा होती है।”
राष्ट्रपति पेजेश्कियन को अभी भी उम्मीद
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि अमेरिका के साथ डिप्लोमैटिक ब्रेकथ्रू की संभावना अभी भी है, बशर्ते वॉशिंगटन अपना नजरिया बदले। उन्होंने अमेरिका से “सर्वाधिकारवाद” को छोड़ने और ईरान के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की। ऐसा बदलाव एक समझौते का रास्ता बना सकता है। बता दें, सर्वाधिकारवाद एक ऐसी राजनीतिक प्रणाली है, जिसमें राज्य सार्वजनिक और निजी जीवन के हर पहलू पर पूर्ण नियंत्रण रखता है।
बातचीत के दौरान क्या हुआ?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार 12 अप्रैल की सुबह अमेरिका-ईरान वार्ता के खत्म होने का ऐलान किया था। वेंस ने कहा था कि बातचीत खत्म हो गई है और बुरी खबर यह है कि कोई समझौता नहीं हो सका है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने शर्तें मानने से इनकार कर दिया है। लेकिन अब तेहरान ने दावा किया है कि इजरायल से आई एक फोन कॉल के बाद बातचीत खत्म हुई।
नेतन्याहू की फोन कॉल का प्रभाव
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया है कि बेंजामिन नेतन्याहू ने जेडी वेंस को एक फोन कॉल की थी, जिसके बाद वार्ता टूट गई। यह फोन कॉल अमेरिका-ईरान वार्ता के दौरान हुई थी और इसके बाद ही बातचीत खत्म हो गई। यह फोन कॉल एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गई, जिसने दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावनाओं को कम कर दिया।
भविष्य की संभावनाएं
इस घटना के बाद, अमेरिका-ईरान संबंधों के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे क्या होगा और क्या दोनों पक्ष फिर से बातचीत के लिए तैयार होंगे। एक बात तो तय है कि इस घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।
