ईरान की 80% वायु रक्षा और 90% हथियार फैक्ट्रियां तबाह, फिर भी अमेरिका-इजरायल के लिए बना है बड़ा खतरा

लगभग 40 दिनों की भीषण लड़ाई के बाद, अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ नेता शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान की धरती पर पहुंचे हैं। इस्लामाबाद में हो रही इस बैठक का उद्देश्य विनाशकारी संघर्ष का समाधान खोजना है। इस युद्ध में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन इसके बावजूद ईरान की हमला करने की क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, जो एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।

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शांति वार्ता के बीच तबाही का मंजर

अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापना की कोशिशें जारी हैं, लेकिन पिछले 40 दिनों के युद्ध ने ईरान में भारी तबाही मचाई है। देश की सैन्य और लड़ाकू क्षमता को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त किया गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर 13,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है। आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा (ACLED) से प्राप्त स्वतंत्र आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजरायल ने लगातार ईरान पर हमले किए हैं। इन हमलों का मुख्य निशाना ईरानी सैन्य ठिकाने और हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियां थीं, जिससे ईरान की युद्ध क्षमता को गहरा धक्का लगा है।

ईरानी सेना को हुआ कितना नुकसान?

अमेरिकी और इजरायली हमलों ने ईरान की सैन्य शक्ति को कई मोर्चों पर कमजोर कर दिया है। आंकड़ों के अनुसार, ईरान को निम्नलिखित प्रमुख नुकसान हुए हैं:

  • ईरान के 80% से अधिक एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट कर दिया गया है।
  • 1,500 से ज्यादा हवाई सुरक्षा से जुड़े ठिकानों पर सीधे हमले किए गए।
  • 450 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइल भंडारण सुविधाओं को निशाना बनाया गया।
  • 800 वन-वे अटैक ड्रोन के स्टोरेज ठिकानों पर बमबारी की गई।
  • ईरान की 90% से ज्यादा नियमित नौसेना को समुद्र में डुबो दिया गया है।

अमेरिकी अधिकारियों के दावे और चेतावनियां

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने ईरानी सैन्य ढांचे को हुए नुकसान की पुष्टि की है। अमेरिका के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ, जनरल डैन केन ने बुधवार को पेंटागन में पत्रकारों को बताया, “हमने 1500 से ज्यादा एयर डिफेंस ठिकानों, 450 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल स्टोरेज सुविधाओं और 800 वन-वे अटैक ड्रोन स्टोरेज सुविधाओं पर हमला किया है। ये सभी सिस्टम खत्म हो चुके हैं।”

वहीं, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी कहा कि “ईरानी नौसेना ‘पूरी तरह से तबाह हो गई है।'” जनरल केन ने आगे बताया कि जहां 150 ईरानी जहाज ‘समुद्र की तलहटी में हैं’, वहीं ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड की छोटी हमलावर नावों में से केवल आधी ही डूब पाई हैं। इन नावों का इस्तेमाल ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक और युद्धपोतों को परेशान करने के लिए करता था। इसके अलावा, जनरल केन ने यह भी दावा किया कि 700 से अधिक हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान की 95% से अधिक नौसैनिक सुरंगों को नष्ट कर दिया है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने स्वीकार किया कि इन सब के बावजूद ईरान में अभी भी हमला करने की क्षमता मौजूद है।

हथियार कारखानों और परमाणु ठिकानों पर हमले

ईरान की हथियार उत्पादन क्षमता को भी गंभीर रूप से लक्षित किया गया। हमलों के मुख्य बिंदु इस प्रकार थे:

  • ईरान के 90% हथियार कारखानों पर हमला किया गया।
  • देश के 80% परमाणु औद्योगिक ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।
  • ईरान की 95 प्रतिशत से अधिक नौसेना का बेड़ा खत्म कर दिया गया है।
  • बचे हुए 5 प्रतिशत नौसैनिक बेड़े से भी अमेरिका को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

इजरायल की भूमिका और हमलों का पैमाना

इस युद्ध में इजरायल ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इजरायली रक्षा बलों (IDF) के अनुसार, युद्ध के दौरान उसने ईरान पर 1,000 से अधिक हमलों की लहरों में 18,000 से ज्यादा बम गिराए। IDF के मुताबिक, ईरान के अंदर 4,000 से ज्यादा ठिकानों पर 10,800 से ज्यादा अलग-अलग हमले किए गए। इन ठिकानों में एयर डिफेंस सिस्टम, बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर, हथियार उत्पादन स्थल, परमाणु ठिकाने, सैन्य मुख्यालय और कमांडरों को निशाना बनाया गया। इजरायली वायु सेना (IAF) के लड़ाकू विमानों ने ईरान के लिए लगभग 8,500 उड़ानें भरीं। IDF का अनुमान है कि इजरायल ने ईरान के अनुमानित 470 बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों में से लगभग 60% को नष्ट या निष्क्रिय कर दिया है।

खतरनाक बनी हुई है ईरान की जवाबी क्षमता

भारी नुकसान के बावजूद, ईरान की जवाबी हमला करने की क्षमता अभी भी एक बड़ा खतरा बनी हुई है। ईरानी सेना अभी भी अमेरिका और इजरायल के ठिकानों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। उसके पास बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने की क्षमता मौजूद है। युद्ध के दौरान ईरान ने अमेरिका के कई विमानों को मार गिराया, जिसमें एक F-15 लड़ाकू विमान भी शामिल था। इसके अलावा, ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी हवाई ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए कई अन्य विमानों को भी नुकसान पहुंचाया, जो यह साबित करता है कि उसे पूरी तरह से कमजोर समझना एक बड़ी भूल हो सकती है।

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