होर्मुज का विकल्प तैयार, क्या पाइपलाइनों का जाल खत्म करेगा ईरान का दबदबा और वैश्विक तेल संकट?

मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। इस कदम से तेल और गैस आयात करने वाले देशों में चिंता बढ़ गई है। इसके जवाब में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देश ईरान के प्रभाव को कम करने के लिए पाइपलाइनों का एक वैकल्पिक नेटवर्क तैयार कर रहे हैं, ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित किया जा सके।

पढ़ने का समय: 3 मिनट

क्यों दुनिया के लिए अहम है होर्मुज?

मध्य पूर्व में जारी तनाव ने एक वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दे दिया है, जिससे अपनी जरूरतों के लिए तेल और गैस का आयात करने वाला हर देश प्रभावित हुआ है। इस संकट का मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का बंद होना है। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने इस महत्वपूर्ण वैश्विक ऊर्जा परिवहन मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है। यह फारस की खाड़ी से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति के लिए एकमात्र समुद्री मार्ग है। ईरान का इस पर नियंत्रण उसे वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बड़ी सामरिक शक्ति प्रदान करता है, जिसका उपयोग वह अपने दुश्मनों के खिलाफ करता रहा है।

खाड़ी देशों की जवाबी रणनीति: पाइपलाइनों का जाल

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के बढ़ते प्रभाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की उसकी क्षमता से खाड़ी देश चिंतित हैं। इसी कारण वे होर्मुज के विकल्प पर तेजी से काम कर रहे हैं। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने पिछले संघर्षों से सबक लेते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य से बचकर निकलने के लिए कुछ बाईपास पाइपलाइनें पहले ही बना ली हैं।

ये देश भविष्य में कई अन्य आपातकालीन पाइपलाइनों के निर्माण की भी योजना बना रहे हैं। इसके अलावा, कुवैत भी वैकल्पिक पाइपलाइनों के निर्माण के लिए अपने पड़ोसी देशों के साथ सहयोग करने पर विचार कर रहा है। यदि खाड़ी देशों की यह योजना सफल होती है, तो ऊर्जा बाजार पर ईरान का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो जाएगा और अमेरिका या अन्य विरोधी देशों से सौदेबाजी करने की उसकी क्षमता भी कमजोर पड़ जाएगी।

ईरान भी चल रहा अपनी चाल

ईरान भी इस स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ है और वह भी अपने विकल्पों पर काम कर रहा है। एक तरफ जहां वह अपनी सैन्य शक्ति को लगातार बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर वह भी वैकल्पिक मार्गों की तलाश में है। ईरान तुर्की के रास्ते भूमध्य सागर के तट तक अपना तेल पहुंचाने के लिए एक महत्वाकांक्षी पाइपलाइन परियोजना पर काम कर रहा है, ताकि होर्मुज पर उसकी निर्भरता कुछ हद तक कम हो सके।

क्या पाइपलाइनें बन पाएंगी होर्मुज का स्थायी विकल्प?

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि ये सभी पाइपलाइनें चालू हो जाती हैं, तो अगले पांच वर्षों में फारस की खाड़ी में कई और बाईपास मार्ग बन सकते हैं। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व उतना नहीं रह जाएगा, जितना आज है। तब ईरान चाहकर भी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को पूरी तरह से बाधित नहीं कर पाएगा।

हालांकि, इन पाइपलाइनों के निर्माण का यह अर्थ नहीं है कि होर्मुज की जरूरत पूरी तरह खत्म हो जाएगी। होर्मुज से प्रतिदिन गुजरने वाले तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की विशाल मात्रा को पूरी तरह से पाइपलाइनों के जरिए पहुंचाना एक बड़ी चुनौती होगी। इससे न केवल परिवहन की लागत बढ़ेगी, बल्कि इन पाइपलाइनों पर भी ईरानी हमलों का खतरा हमेशा बना रहेगा। फिर भी, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत भविष्य में इन पाइपलाइनों का उपयोग करके ईरान से उत्पन्न होने वाले खतरों को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

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