असम चुनाव की तिथियाँ और सीटें
असम में 126 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 9 अप्रैल को एक ही चरण में होगा और jeho नतीजों की घोषणा 4 मई को की जाएगी। यह चुनावी कार्यक्रम 2026 के अप्रैल महीने में आयोजित होगा, जिसे लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज़ हो गई है। चुनावी तैयारियों के बीच हिमंत बिस्वा सरमा ने रैली के मंच से कांग्रेसियों को चेतावनी दी है, जिससे राजनैतिक माहौल और अधिक कटु हो गया है।
मुख्यमंत्री का तीखा प्रहार
रैली के दौरान सीएम सरमा ने कहा, “जो लोग कहते हैं कि वे हिमंत बिस्वा सरमा को गिरफ्तार करेंगे, उन्हें बता दूँ कि इसके लिए इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और राहुल को दोबारा जन्म लेना पड़ेगा।” उन्होंने राहुल गांधी को “पप्पू” और उनके सहयोगी गौतम गोगोई को “छोटा पप्पू” कहा, जिससे राजनीतिक टोन और तीखा हो गया। यह बयान कई जन्मों तक चलने वाले टकराव का संकेत है, क्योंकि सरमा ने स्पष्ट किया कि यह इस जन्म में नहीं होने वाला है।
कांग्रेस का प्रतिशोधी प्रहार
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल प्लेटफ़ॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “हिमंत बिस्वा सरमा को लगता है कि वह कानून से ऊपर हैं, इसलिए उन्हें एक कुदरती नियम याद रखना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “आप जितनी ऊँचाई पर खड़े होते हैं, उतनी ही जोर से गिरते हैं। CM के घर से तिहाड़ तक – यह तो बस शुरुआत होगी।” यह बयान सरमा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावनाओं और उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठाता है।
राहुल गांधी का आरोप‑आधारित बयान
गुरुवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में राहुल गांधी ने हिमंत बिस्वा सरमा को “भारत का सबसे भ्रष्ट सीएम” कहा और आरोप लगाया कि सरमा का परिवार “भ्रष्टाचार में नंबर 1” है। उन्होंने कहा, “हिमंत बिस्वा सरमा और उनका परिवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ ‘लैंड ATM’ चला रहे हैं।” यह आरोप असम में सत्तारूढ़ दल के खिलाफ गंभीर आरोपों की ओर इशारा करता है और कांग्रेस के ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ’ अभियान को तेज़ करता है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और चुनावी रणनीतियाँ
असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार अपने प्रतिद्वंद्वियों पर हमले बोल रहे हैं, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राज्य में व्याप्त ‘भ्रष्ट तंत्र’ को उजागर करने का संकल्प दिया है। दोनों पक्ष अपने अपने आरोपों और बचावात्मक बयानों के साथ चुनावी जनसम्पर्क में तेज़ी से जुटे हैं। 9 अप्रैल को होने वाले एक‑फ़ेज चुनाव में 126 सीटों के साथ ही वोटरों की पहली बार की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस चुनावी रणनीति में ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ’ और ‘पुनर्जन्म’ जैसे कड़े शब्द अब प्रमुख मुद्दे बन चुके हैं।
