पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में नामांकन से ठीक पहले एक कांग्रेस उम्मीदवार ने सुप्रीम कोर्ट से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर तत्काल सुनवाई की अपील

सुप्रीम कोर्ट ने अपीलेट ट्रिब्यूनल से कहा है कि पहले चरण के लिए आखिरी तारीख पर नॉमिनेशन की समयसीमा खत्म होने से पहले याचिकाकर्ता के मामले का निपटारा कर दिया जाए. याचिकाकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में अपने मुवक्किल का पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता कांग्रेस के उम्मीदवार हैं और वह पिछली दो बार से चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें उन्हें जीत मिली है, लेकिन तीन अप्रैल को उनका आवेदन खारिज कर दिया गया, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है.

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सुप्रीम कोर्ट ने अपीलेट ट्रिब्यूनल से कहा है कि पहले चरण के लिए आखिरी तारीख पर नॉमिनेशन की समयसीमा खत्म होने से पहले याचिकाकर्ता के मामले का निपटारा कर दिया जाए. याचिकाकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में अपने मुवक्किल का पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता कांग्रेस के उम्मीदवार हैं और वह पिछली दो बार से चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें उन्हें जीत मिली है, लेकिन तीन अप्रैल को उनका आवेदन खारिज कर दिया गया, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है.

चुनाव आयोग के वकील डीएस नायडू ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ट्रिब्यूनल को इस बारे में जानकारी दी जा चुकी है और जस्टिस टी. एस. शिवज्ञानम सीधे संपर्क कर सकते हैं. हालांकि, फिर भी वकील ने कोर्ट से आदेश देने की अपील की, जिस पर कोर्ट ने आदेश दिया, ‘नॉमिनेशन की आज आखिरी तारीख है इसलिए तात्कालिकता को ध्यान में रखते हुए अपीलेट ट्रिब्यूनल से अनुरोध किया जाता है कि वह नॉमिनेशन खत्म होने से पहले ही याचिकाकर्ता के मामले पर फैसला ले ले.’

19 पूर्व जजों वाले अपीलेट ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता

19 पूर्व जजों वाले अपीलेट ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कोलकाता हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस टी. एस. शिवज्ञानम कर रहे हैं. यह ट्रिब्यूनल उन मामलों को देख रहा है, जिन्हें वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया है. याचिकाकर्ता के मामले में तुरंत सुनवाई और फैसले की अपील के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपीलेट ट्रिब्यूनल से जल्दी फैसला लेने के लिए कहा है, ताकि याचिकाकर्ता समय पर नामांकन कर सकें.

यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आया है, जहां कांग्रेस उम्मीदवार का नाम वोटर लिस्ट से कट गया है और वह नामांकन के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील लेकर आया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अपीलेट ट्रिब्यूनल को याचिकाकर्ता के मामले पर तुरंत फैसला लेना होगा, जिससे वह नामांकन की आखिरी तारीख से पहले अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सके. यह मामला चुनाव आयोग और न्यायपालिका के बीच तालमेल को दर्शाता है, जहां न्यायपालिका चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रही है ताकि उम्मीदवारों के अधिकारों की रक्षा की जा सके.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का महत्व इस प्रकार है:

न्यायिक हस्तक्षेप: सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिखाता है

  1. न्यायिक हस्तक्षेप: सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिखाता है कि न्यायपालिका चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर सकती है ताकि उम्मीदवारों के अधिकारों की रक्षा की जा सके.
  2. तात्कालिकता: सुप्रीम कोर्ट ने अपीलेट ट्रिब्यूनल से अनुरोध किया है कि वह याचिकाकर्ता के मामले पर तुरंत फैसला ले, जो दिखाता है कि न्यायपालिका समय की महत्ता को समझती है.
  3. चुनाव आयोग की भूमिका: यह मामला चुनाव आयोग की भूमिका को भी दर्शाता है, जो चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए जिम्मेदार है.
  4. उम्मीदवारों के अधिकार: सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट होता है कि उम्मीदवारों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी और उन्हें न्याय मिलेगा, भले ही उन्हें चुनाव प्रक्रिया में कठिनाइयों का सामना करना पड़े.
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