ईरान-अमेरिका युद्धविराम के बीच इजरायल का दावा: हिजबुल्लाह चीफ नईम कासिम के भतीजे अली यूसुफ हारशी को बेरूत में मार गिराया

मध्य पूर्व में तनाव जारी है, जहां अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिन के युद्धविराम पर सहमति बनने के बावजूद इजरायल ने एक बड़ा दावा किया है। इजरायली सेना ने लेबनान की राजधानी बेरूत में रात भर चले हमले में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के प्रमुख नईम कासिम के भतीजे अली यूसुफ हारशी को मार गिराने की घोषणा की है। यदि हिजबुल्लाह इस मौत की पुष्टि करता है, तो यह समूह और ईरान के लिए एक बड़ा झटका होगा, क्योंकि हिजबुल्लाह मध्य पूर्व में ईरान का एक प्रमुख सहयोगी है।

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सीजफायर के बावजूद इजरायल का लेबनान पर हमला जारी

अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिनों के युद्धविराम पर सहमति बनने के बावजूद, मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं हुआ है। इसी बीच, इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में रात भर चले सैन्य अभियान में एक बड़ी सफलता का दावा किया है। इजरायली सेना (आईडीएफ) ने घोषणा की है कि उन्होंने हिजबुल्लाह के प्रमुख नईम कासिम के निजी सचिव और भतीजे, अली यूसुफ हारशी को मार गिराया है। इस घटना ने क्षेत्र में पहले से मौजूद अस्थिरता को और बढ़ा दिया है। अभी तक हिजबुल्लाह की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने गुरुवार, 9 अप्रैल को ऐलान किया कि बेरूत में हुए रात भर के हमले में उन्होंने ईरान के प्रभावशाली सहयोगी, हिजबुल्लाह के प्रमुख नईम कासिम के भतीजे को निशाना बनाया। यदि हिजबुल्लाह इस मौत की पुष्टि करता है, तो यह समूह और तेहरान के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक झटका होगा। हिजबुल्लाह समूह मध्य पूर्व में ईरान के सबसे मजबूत सहयोगियों में से एक है और उसकी सैन्य क्षमताएं क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इजरायली हमलों में लेबनान में भारी जान-माल का नुकसान

ईरान के साथ युद्धविराम की सहमति के बावजूद, इजरायल ने लेबनान के खिलाफ अपने हवाई हमलों को तेज कर दिया है। बुधवार, 8 अप्रैल से अब तक जारी हमलों में 254 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 1165 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हमलों में लेबनान के एक प्रमुख इमाम की भी दुखद मृत्यु हो गई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया था कि युद्धविराम की शर्तों में लेबनान शामिल नहीं होगा, जिससे यह संकेत मिलता है कि इजरायल की सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।

इन हमलों के कारण लेबनान में गंभीर मानवीय संकट उत्पन्न हो गया है। अस्पतालों में घायलों की भीड़ लगी है और बुनियादी ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है। लेबनान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है ताकि और अधिक रक्तपात को रोका जा सके।

ईरान के विदेश मंत्री ने युद्धविराम रद्द करने की चेतावनी दी

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजरायल द्वारा लेबनान पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकने की चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ये हमले जारी रहे, तो ईरान अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते को रद्द करने पर मजबूर होगा। श्री अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “ईरान-अमेरिका युद्धविराम की शर्तें बिल्कुल स्पष्ट हैं। अमेरिका को या तो युद्धविराम का रास्ता चुनना होगा या फिर इजरायल के माध्यम से युद्ध जारी रखना होगा। वह दोनों एक साथ नहीं चुन सकता।”

यह बयान ईरान के रुख को और भी सख्त बनाता है और यह दर्शाता है कि वह अपने सहयोगियों की सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर है। अमेरिका के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती है, क्योंकि उसे ईरान और इजरायल दोनों के साथ संबंधों को संतुलित करना होगा।

नईम कासिम: हिजबुल्लाह के एक प्रमुख नेता की प्रोफाइल

नईम कासिम, जिनका पूरा नाम शेख नईम कासिम है, हिजबुल्लाह आंदोलन के एक प्रमुख वैचारिक और राजनीतिक नेता हैं। hezbollah.org के अनुसार, उनका जन्म दक्षिणी लेबनान के नबातियेह प्रांत के कफर किला गांव में हुआ था। कासिम को हिजबुल्लाह के मुख्य विचारकों में से एक माना जाता है और वह संगठन के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं।

उन्होंने 1970 में लेबनानी विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके साथ ही, उन्होंने प्रमुख शिया धर्मगुरु अयातुल्ला मोहम्मद हुसैन फदलल्लाह के मार्गदर्शन में अपने धार्मिक और इस्लामिक अध्ययन को आगे बढ़ाया। 1974 से 1988 तक, वह एसोसिएशन फॉर इस्लामिक रिलीजियस एजुकेशन के प्रमुख रहे और लेबनानी मुस्लिम छात्रों के संघ के संस्थापक सदस्यों में से भी थे। उनकी पृष्ठभूमि और विचार उन्हें हिजबुल्लाह के भीतर एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बनाते हैं, और उनके भतीजे की मौत से संगठन की मनोबल पर असर पड़ सकता है।

क्षेत्रीय संघर्ष का बढ़ता दायरा

ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम के बावजूद, इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच की झड़पें इस ओर इशारा करती हैं कि यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कई क्षेत्रीय शक्तियां शामिल हो गई हैं। हिजबुल्लाह, जो ईरान का एक प्रमुख प्रॉक्सी समूह है, अक्सर इजरायल के खिलाफ संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अली यूसुफ हारशी की मौत, यदि पुष्टि हो जाती है, तो यह सीधे तौर पर ईरान के एक वरिष्ठ नेता के करीबियों को निशाना बनाने जैसा होगा। इससे ईरान और इजरायल के बीच सीधा टकराव बढ़ने की आशंका बढ़ सकती है, भले ही अमेरिका एक शांतिपूर्ण समाधान की वकालत कर रहा हो। यह स्थिति पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र को अस्थिर कर सकती है और वैश्विक शांति के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकती है।

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