चौधरी बनने की चाह में पाकिस्तान ने फैला दिया रायता, इज़राइल ने लेबनान पर मचा कोहरा: विभिन्न दावे और परिणाम

इज़राइल की सेना ने बेरूत, दक्षिणी लेबनान और पूर्वी बेका घाटी में मात्र 10 मिनट में हिज़बुल्ला के 100 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे इस संघर्ष में सबसे बड़ा हमला कहा गया। इस बीच, पाकिस्तान के मध्यस्थता के दावे और लेबनान को सीजफायर में शामिल करने के प्रयासों को इज़राइल ने ठुकरा दिया, जिससे क्षेत्र में भ्रम और तनाव बढ़ा।

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इज़राइल के बड़े हवाई हमले के विवरण

9 अप्रैल, 2026 को इज़राइल ने बिना किसी चेतावनी के मध्य बेरूत के घनी आबादी वाले कई रिहायशी क्षेत्रों पर हवाई हमले किए। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इन हमलों में प्रारम्भिक रूप से कम से कम 182 नागरिक मृत्युकंठित हुए, जबकि कुल पीड़ितों की संख्या 900 से अधिक घायल तक पहुँच सकती है। इस हवाई हमले में कई रणनीतिक लक्ष्य शामिल थे, जैसे दक्षिणी लेबनान के उपनगर, दक्षिणी बेरूत और पूर्वी बेका घाटी, जहां हिज़बुल्ला के तैनात ठिकानों को निशाना बनाया गया। इज़राइल ने इन कार्रवाइयों को इस युद्ध में “सबसे बड़ा हमला” घोषित किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीव्र प्रतिक्रियाएं उभरीं।

पाकिस्तान के मध्यस्थता दावे और वे विवादित क्यों हैं

पाकिस्तान ने इस संघर्ष के दौरान “सीजफायर सभी मोर्चों पर लागू होगा, जिसमें लेबनान भी शामिल है” का दावा किया। शहबाज शरीफ, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, ने कहा कि उनका लक्ष्य सभी पक्षों को शांति की दिशा में ले जाना है। इसी बीच, अमेरिका के राजदूत रिज़वान सईद शेख ने भी इस दावे को समर्थन दिया, यह बताते हुए कि लेबनान को भी समझौते का हिस्सा माना गया था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू दोनों ने स्पष्ट रूप से कहा कि लेबनान को सीजफायर में शामिल नहीं किया गया है, जिससे विदेश नीति में गहरी असंगति उत्पन्न हुई।

इज़राइल और अमेरिका के स्पष्ट बयानों का प्रभाव

इज़राइल के विदेश मंत्रालय ने तुरंत उत्तर दिया, “लेबनान पर कोई सीजफायर नहीं है, और हमारे हवाई हमले इस तथ्य को दर्शाते हैं कि हम इस क्षेत्र को नहीं छोड़ेंगे।” वहीं, वाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने दोहराते हुए कहा, “हमारी स्थिति स्पष्ट है—लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है।” इस स्पष्टता के बावजूद, पाकिस्तान के अधिकारियों ने अपना दायरा नहीं घटाया, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में “कन्फ्यूशन” शब्द प्रचलित हो गया।

ईरान की प्रतिक्रिया और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बंद होना

इज़राइल के हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को फिर से बंद कर दिया, जिसका उद्देश्य लेबनान पर इज़राइल के आक्रमण को जवाब देना बताया गया। ईरान के अर्धसैनिक बल इज़राइल के “आक्रामकता” को ईरान की “आक्रमण” के समान मानते हुए, जनरल सैयद माजिद मूसावी ने सोशल मीडिया पर चेतावनी जारी की, “लेबनान के प्रति आक्रमण ईरान के प्रति आक्रमण है।” इससे क्षेत्रीय सुरक्षा स्थितियों में और अधिक तनाव उत्पन्न हुआ।

अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा, “लेबनान में युद्ध का अंत अमेरिका के साथ हुए समझौते का हिस्सा है, लेकिन अब वह वादा पूरा नहीं हो रहा।” उन्होंने तीन शर्तों का हवाला देते हुए इज़राइल और अमेरिका पर “धोखा” का आरोप लगाया। वाइट हाउस ने इस आरोप को “अस्वीकार्य” कहा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पुनः बंद होने की निंदा की। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस स्थिति में त्वरित लोकतांत्रिक समाधान की मांग की।

पाकिस्तान की स्थिति पर विश्लेषण और भविष्य की सम्भावनाएँ

पाकिस्तान की मध्यस्थता को अक्सर “राजनीतिक माहौल में चमक बनाने” के रूप में देखा जाता है, लेकिन वास्तविकता में इस कदम ने क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा दिया है। शहबाज शरीफ के दावे और उनके विदेश राजनयिकों की असंगत भाषा ने यह प्रश्न उठाया कि क्या पाकिस्तान वास्तव में शांति प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहा है या केवल अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इस विषय पर विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान को अपनी नीति को स्पष्ट और पारदर्शी बनाना चाहिए, ताकि “सीजफायर” जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भ्रम न उत्पन्न हो।

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