“बस 500 मीटर दूर गिर रहे गोले”: नाविकों की दर्दभरी दास्तां
ईरान और अमेरिका के बीच गहराते सैन्य संघर्ष ने समंदर में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की जान को भारी जोखिम में डाल दिया है। ईरान के खुर्रमशहर पोर्ट पर फंसे दर्जनों भारतीय नाविक इस समय भीषण डर के माहौल में जीने को मजबूर हैं। बंदरगाह के आसपास लगातार हो रहे धमाकों और मिसाइल हमलों ने इन नाविकों की रातों की नींद छीन ली है। युद्ध के इन खौफनाक हालातों के बीच एबीपी न्यूज ने इन फंसे हुए नाविकों से सीधे बात की, जिसमें उन्होंने अपनी बेबसी और मौत का डर साझा किया।
एक जहाज पर मौजूद नाविक मोहित अरहवाल ने बताया कि स्थिति कल्पना से भी ज्यादा डरावनी है। उन्होंने कहा, “हमारी शिप जहां लंगर डाले खड़ी है, वहां से महज 500 से 600 मीटर की दूरी पर लगातार धमाके हो रहे हैं। हम सो नहीं पाते।” नाविकों में गहरी दहशत है कि अगर कोई मिसाइल चूककर उनके शिप पर आ गिरी, तो उनका क्या होगा? उन्होंने बताया कि खौफ का आलम यह है कि धमाकों की आवाज सुनते ही लोग जहाज से उतरकर बंदरगाह की तरफ भागते हैं।
एजेंट के झूठे वादे और परिवार से टूटा संपर्क
वहीं, एक दूसरी शिप पर फंसे अंकित यादव ने अपनी लाचारी जाहिर करते हुए बताया कि उनके एजेंट स्थिति के सामान्य होने का केवल दिलासा दे रहे हैं। अंकित ने सवाल उठाया, “एजेंट कहता है कि जब हालात थोड़े ठीक होंगे, तब हमें यहां से निकाला जाएगा। लेकिन अगर स्थिति सामान्य होने से पहले कोई बड़ा हादसा हो गया, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?” अंकित ने यह भी खुलासा किया कि इस मुश्किल घड़ी में उन्हें समय पर पगार (सैलरी) भी नहीं मिल रही है, जिससे उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं।
एक अन्य नाविक मनोज ने बताया कि फंसे हुए भारतीयों की मुश्किलें हर गुजरते दिन के साथ बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया, “कल रात ही यहां करीब तीन घंटे तक भारी बमबारी हुई। रोजाना मिसाइलें बरस रही हैं। जिन नाविकों के पास इंटरनेट और मोबाइल रिचार्ज है, वे किसी तरह अपने घर पर बात कर पा रहे हैं, लेकिन बाकी लोग अपने परिवार से पूरी तरह कट चुके हैं।”
सरकार से मदद की गुहार: यूनियन ने विदेश मंत्रालय को लिखा पत्र
इन असहाय भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर अब फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। यूनियन के महासचिव मनोज यादव ने इस गंभीर स्थिति को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर को एक आधिकारिक पत्र लिखा है। पत्र में बताया गया है कि खुर्रमशहर पोर्ट पर लगभग 50 जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद हैं।
यूनियन द्वारा विदेश मंत्रालय को सौंपी गई सूची के अनुसार, इन जहाजों पर भारतीय क्रू सदस्य मौजूद हैं:
- CARBON
- INFINITY
- RADIN
- MOTAF 3
- SUNNY
- ANOOSH 1
- YASIN
- RANA 110
- PAYAM 2
- BAZOO 1
नाविकों का रिकॉर्ड न होना एक बड़ी चुनौती
FSUI के महासचिव मनोज यादव ने बचाव कार्य में आने वाली एक व्यावहारिक चुनौती पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया, “आमतौर पर, जिन नाविकों की भर्ती RPSL (रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विसेज लाइसेंस) के माध्यम से होती है, उनकी पूरी जानकारी सरकार के पास उपलब्ध होती है।”
हालांकि, उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, “कई नाविक ऐसे भी हैं जो दुबई या किसी अन्य देश से सीधे नौकरी करने चले जाते हैं। ऐसे मामलों में, उनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड भारत सरकार के पास मौजूद नहीं होता है।” रिकॉर्ड की यह कमी सभी फंसे हुए भारतीयों का पता लगाने और उन तक समय पर मदद पहुंचाने के काम को जटिल बना देती है।
