भारत की रक्षा को मजबूत करने का एक और बड़ा कदम: रूस से तुंगुस्का डिफेंस सिस्टम खरीदेगा भारत

भारत ने अपनी रक्षा को और मजबूत करने के लिए एक और बड़ा कदम उठाते हुए रूस से तुंगुस्का डिफेंस सिस्टम खरीदने का ऐलान किया है. यह सौदा भारत की मल्टी लेयर एयर डिफेंस क्षमता को और बढ़ाएगा और देश की रक्षा को मजबूत बनाएगा. इस सौदे के तहत भारत ने रूस की जीएससी रोसोबोरोन एक्सपोर्ट के साथ 445 करोड़ की डील की है. ये तुंगस्का सिस्टम भारतीय सेना (थलसेना) के लिए खरीदा जाएगा ताकि जंग के मैदान में टैंक और मैकेनाइज्ड व्हीकल्स को हवाई सुरक्षा प्रदान की जा सके. रक्षा मंत्रालय ने तुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की खरीद और P8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान के निरीक्षण (डिपो स्तर) के लिए कुल 858 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए हैं.

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भारत की मल्टी लेयर एयर डिफेंस क्षमता बढ़ेगी

भारत ने साल 2018 में रूस के साथ कुल 5 स्क्रॉड्रन एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद का सौदा किया था, जिसकी कीमत लगभग 40 अरब डॉलर आंकी जा रही है. इसमें से तीन स्क्रॉड्रन भारत को मिल चुके हैं, जबकि दो की डिलीवरी अभी बाकी है. रूस ने हाल ही में कहा कि वह बाकी स्क्रॉड्रन की डिलीवरी इसी साल के अंत तक भारत को कर देगा. इस सौदे से भारत की मल्टी लेयर एयर डिफेंस क्षमता बढ़ेगी और देश की रक्षा को मजबूत बनाएगा.

भारतीय रक्षा बलों की जरूरत

भारत की बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक पहुंच के साथ ही उसकी सैन्य जरूरतें भी बदल रही हैं. भारत को पूरे क्षेत्र में एक मजबूत रक्षा तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है, जिससे वह अपनी सीमाओं की सुरक्षा कर सके और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में अपनी भूमिका निभा सके. इसके लिए भारत की मल्टी लेयर एयर डिफेंस क्षमता बहुत जरूरी है, जिससे वह अपने ऊपर से होने वाले हवाई हमलों से बच सके और अपने रक्षा बलों को मजबूती प्रदान कर सके.

तुंगुस्का एंटी-एयरक्राफ्ट एंड मिसाइल सिस्टम टैंक की तरह दिखता है

तुंगुस्का एंटी-एयरक्राफ्ट एंड मिसाइल सिस्टम टैंक की तरह दिखता है, जो दुश्मन के एयरक्राफ्ट, हैलीकॉप्टर, ड्रोन और क्रूज मिसाइल तक को मार गिरा सकता है. रूस की सेना ने यूक्रेन के खिलाफ इसका इस्तेमाल किया है. यह सिस्टम एक ऐसा वाहन है जो अपने बैटरी के भीतर दुश्मन के उड़ने वाली वस्तुओं को मार गिराने वाले हथियारों से लैस होता है, जो अपने साथ मौजूद मिसाइलों को हवाई लक्ष्य पर लक्षित करते हुए उन्हें मार गिराते हैं और जो सिस्टम के बैटरी की रक्षा करते हैं।

दरअसल, ये इसलिए बेहद खास है क्योंकि इसमें गन और मिसाइलें लगी हुई हैं. जो अपने प्रक्षेपण के बाद अपने लक्ष्य को हिट करते हैं और जो सिस्टम के बैटरी पर खतरा पैदा कर सकते हैं, उन्हें मारने के लिए मौजूद है. इस सिस्टम के साथ भारत की रक्षा को और मजबूत किया जाएगा और देश की सुरक्षा को बढ़ाया जाएगा।

पी-8आई विमान के लिए 413 करोड़ की डील

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए पी-8आई लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान के डिपो-स्तरीय निरीक्षण के लिए बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ 413 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए. इस अनुबंध के तहत भारतीय नौसेना को पी-8आई विमानों के लिए आवश्यक उपकरण और टूल्स प्रदान किए जाएंगे, जिससे विमानों का रखरखाव और मरम्मत स्वयं की जा सके और देश के भीतर ही किया जा सके. इस तरह, भारतीय नौसेना की लंबी दूरी के समुद्री टोही विमानों की क्षमता बढ़ जाएगी और नौसेना की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

भारत के रक्षा खर्च में वृद्धि

भारत के रक्षा खर्च में निरंतर वृद्धि हो रही है, जो एक सकारात्मक संकेत है कि भारतीय रक्षा बल अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रयासरत हैं और अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए हर कदम उठा रहे हैं. भारत ने अपने रक्षा खर्च में 5% की वृद्धि की है, जो एक अच्छे संकेत है कि भारत अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत बना रहा है और अपने रक्षा बलों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए काम कर रहा है।

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