होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से गैस की सप्लाई पर असर पड़ रहा था और भारत पर भी इसका असर दिख रहा था

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त तेल और गैस रूट में से एक है। यहां से वैश्विक स्तर पर करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई होती है। भारत के लिए इस जलमार्ग की अहमियत और ज्यादा है, क्योंकि देश का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी का आयात इसी रास्ते से होता है।

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एलपीजी संकट: 15 दिनों के लिए खुला होर्मुज स्ट्रेट, क्या इससे तुरंत दूर हो जाएगी एलपीजी की कमी?

होर्मुज स्ट्रेट: एक महत्वपूर्ण जलमार्ग

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त तेल और गैस रूट में से एक है। यहां से वैश्विक स्तर पर करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई होती है। भारत के लिए इस जलमार्ग की अहमियत और ज्यादा है, क्योंकि देश का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी का आयात इसी रास्ते से होता है।

भारत पर प्रभाव

भारत लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत से ज्यादा एलएनजी और 90 प्रतिशत एलपीजी इसी रास्ते से आयात करता है। ऐसे में जहाज की आवाजाही रुकने से सप्लाई चैन प्रभावित हुई और देश में संकट गहराने लगा।

सीजफायर के बाद राहत

सीजफायर के बाद भले ही होर्मुज स्ट्रेट खोल दिया गया है, लेकिन देश में एलपीजी से राहत मिलने में समय लग सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार जहाज की आवाजाही सामान्य होने, अटके हुए टैंकरों के निकलने और सप्लाई चैन को पटरी पर लौटने में कुछ समय लगेगा।

दो हफ्तों में क्या हो सकता है?

सीजफायर के इस 15 दिन के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की तैयारी भी चल रही है। दोनों देशों के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में वार्ता प्रस्तावित है। जहां स्थायी समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। ईरान की ओर से 10 बिंदुओं का प्रस्ताव भी दिया गया है, जिसमें युद्ध खत्म करने, प्रतिबंध हटाने और सुरक्षित समुद्री रास्ता सुनिश्चित करने जैसी मांगें शामिल हैं।

होर्मुज स्ट्रेट के खुलने से भारत में एलपीजी की कमी को दूर करने में समय लग सकता है। लेकिन सीजफायर और बातचीत के बाद एक स्थायी समाधान निकलने की उम्मीद है। जिससे देश में एलपीजी और ईंधन की सप्लाई हो सके।

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