ईरान युद्ध के बीच यूएई ने पाकिस्तान से 3.5 अरब डॉलर का कर्ज वापस मांगा तो पाकिस्तानी नेताओं के बयानों से विवाद खड़ा हो गया है। जिस संयुक्त अरब अमीरात के कर्ज पर पाकिस्तान सालों से निर्भर रहा है, उसी को अब पाकिस्तानी नेता ‘मजबूर और बेचारा’ बता रहे हैं, जबकि खुद को ‘बड़ा भाई’ का रोल दे रहे हैं। इतना ही नहीं, भारतीयों की आबादी देखते हुए यूएई को चेतावनी भी दे रहे हैं। पाकिस्तानी नेता का कहना है कि हिंदुस्तानी आबादी से दुबई को सावधान रहना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि ‘अखंड भारत’ बन जाए।
पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के सीनेटर और पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री मुशाहिद हुसैन सैयद ने एक टीवी इंटरव्यू में यूएई को 3.5 अरब डॉलर के ऋण की वापसी का बचाव करते हुए कहा कि यह पाकिस्तान का ‘भाईचारे का फर्ज’ है। उन्होंने कहा कि हमारे यूएई भाई अभी मजबूर और असहाय हैं। हमने उनसे कर्ज लिया था और संकट के समय में इसे लौटा रहे हैं। यह सही फैसला है।
मुशाहिद हुसैन ने आगे दावा किया कि यूएई
मुशाहिद हुसैन ने आगे दावा किया कि यूएई के निर्माण में पाकिस्तान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि हमने उनकी सशस्त्र सेनाओं को प्रशिक्षित किया है। शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयान के समय से ही हमारे अच्छे संबंध रहे हैं। जब भी यूएई संकट में फंसा, पाकिस्तान उसके साथ मजबूती से खड़ा रहा। अब नैतिक दायित्व है कि हम उनकी मदद करें।
सीनेटर मुशाहिद हुसैन का बयान विवादास्पद तब हो गया जब उन्होंने यूएई को भारत से सावधान रहने की ‘सलाह’ दी। न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए गए बयान में उन्होंने कहा कि आपकी आबादी 1 करोड़ है, जिसमें से 43 लाख भारतीय हैं। ध्यान रखें कि भारत के साथ दोस्ताना संबंध आपको ‘अखंड भारत’ का हिस्सा न बना दें।
बता दें कि पाकिस्तान ने जून माह तक कुल 4.8 अरब अमेरिकी डॉलर के विदेशी कर्ज को लौटाने की व्यवस्था की है, जिसमें से 3.5 अरब डॉलर संयुक्त अरब अमीरात को चुकाने हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कुछ दिन पहले पाकिस्तान सरकार ने अप्रैल के अंत तक यूएई को दो अरब डॉलर लौटाने का फैसला किया था। पश्चिम एशिया में ईरान को लेकर बढ़े तनाव के बीच यूएई ने पाकिस्तान से दिए गए ऋण की वापसी की मांग की है।
जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान को
जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान को अपनी बाहरी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए दो मित्र देशों से पांच अरब डॉलर से अधिक के वित्तीय सहयोग का आश्वासन भी प्राप्त हुआ है। इसके अलावा, 10 वर्ष की अवधि वाला 1.3 अरब डॉलर का यूरोबॉन्ड इस सप्ताह मैच्योर हो रहा है, जिससे सरकार पर अल्पावधि में भुगतान का अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने इन सभी भुगतानों को ‘सामान्य वित्तीय लेन-देन’ करार देते हुए कहा है कि यह द्विपक्षीय समझौतों के तहत तय शर्तों के अनुसार किया जा रहा है।
