ईरान युद्ध: अमेरिका जल्द समाप्त करने की दिशा में क्यों बढ़ रहा है?

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लगभग 5 हफ्ते हो गए हैं, लेकिन अमेरिका को अभी तक अपने लक्ष्य हासिल करने में सफलता नहीं मिली है। न तो दोनों देशों के बीच किसी तरह की डील हुई, न ही स्ट्रेट ऑफ हार्मुज खुला, और न ही ईरान ने युद्ध में सरेंडर किया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अमेरिका इतनी जल्दी युद्ध से पीछे क्यों हट रहा है?

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युद्ध की रणनीति में बदलाव

अमेरिका अपने युद्ध की रणनीति में बदलाव करते हुए नजर आ रहा है। कुछ संकेत ऐसे मिले हैं जिनसे यह माना जा रहा है कि अमेरिका ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को जल्द समाप्त करने की ओर बढ़ रहा है। इस दौरान जो ट्रंप चाहते थे, वो कुछ भी होता नजर नहीं आ रहा है।

नाटो के समर्थन की कमी

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिका जहां ईरान को झुकाने में लगा है, तो वहीं दूसरी तरफ नाटो के सहयोगी देशों ने इस युद्ध में अमेरिका का समर्थन करने से मना कर दिया। इससे अमेरिका भड़का हुआ है। ब्रिटेन और फ्रांस ने इस लड़ाई से खुद को दूर कर लिया, बल्कि कई देशों ने अपने यहां अमेरिका के सैन्य विमानों को उतरने की इजाजत ही नहीं दी।

ट्रंप के बयान

हाल ही में डेली टेलीग्राफ अखबार को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह अमेरिका को नाटो से बाहर निकालने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उनका बयान भी ऐसे समय आया है जब अमेरिका की सैन्य कार्रवाई से सहयोगी देशों ने खुद को अलग कर लिया है।

युद्ध के नुकसान

अमेरिका को युद्ध में काफी खर्चा करना पड़ रहा है, इसके अलावा उसके हथियारों से भरा भंडार भी लगातार कम हो रहा है। यूएस के डिफेंस दस्तावेजों से जानकारी मिली है कि अमريكية के पास अब सिर्फ 4 महीने का टॉमहॉक क्रूज मिसाइल का स्टॉक बचा हुआ है। अमेरिका के पास 3,992 टॉमहॉक मिसाइलें हैं। एक महीने में अमेरिका ईरान के खिलाफ 850 मिसाइल दाग चुका है। यानी अगर इसका औसत निकाला जाए तो अमेरिका के पास सिर्फ 3.7 महीनों तक मिसाइल भंडार है।

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