मिडिल ईस्ट में जारी ईरान के युद्ध के 31वें दिन ईरान ने अमेरिका और इजरायल के ठिकानों पर जमकर बमबारी की. ईरान ने कहा कि अगर अमेरिकी सैनिक उनकी जमीन पर उतरे तो वह वापस नहीं जाएंगे. इस बीच रूस एक बार फिरखुलकर ईरान के समर्थन में आया है. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ईरान को नार्मल नहीं देख सकते हैं और ईरान पर अमेरिका-इजरायली हमले से क्षेत्र में परमाणु सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ गया है. उनके अनुसार, यह ईरान और उसके पड़ोसी देशों को परमाणु हथियार विकसित करने के लिए प्रेरित कर सकता है. ईरान युद्ध को बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल देगा, यह भी कहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने कहा कि ईरान और वेनेजुएला को अमेरिका सत्ता परिवर्तन कराना चाह रहा है ताकि वहां के तेल पर नियंत्रण हासिल कर पाए. अमेरिका और इजरायल के हमले के खिलाफ ईरान का रूस समर्थन है और दोनों देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग की आवश्यकता है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि परमाणु हथियार विकसित करने के लिए ईरान की चुनौतियों को स्वीकार करने की जरूरत है. रूस की इसमें मध्यस्थता की भूमिका निभाने की इच्छा है और वह ईरान के साथ संवाद के लिए तैयार है, लेकिन दोनों देशों के बीच के मतभेदों को दूर करने की जरूरत है. ईरान के विदेश मंत्री जavad Zarif ने अमेरिका के खिलाफ ईरान के प्रति नाराजगी व्यक्त की है और कहा है कि ईरान को अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के लिए किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करना है. अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार है लेकिन ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू करना होगा. युद्ध के 31वें दिन ईरान ने अमेरिका और इजरायल के ठिकानों पर जमकर बमबारी की. इस हमले में, ईरान ने कहा कि अगर अमेरिकी सैनिक उनकी जमीन पर उतरे तो वह वापस नहीं जाएंगे. इस हमले के बाद, रूस ने कहा कि ईरान पर अमेरिका-इजरायली हमले से क्षेत्र में परमाणु सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि यह ईरान और उसके पड़ोसी देशों को परमाणु हथियार विकसित करने के लिए प्रेरित कर सकता है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि ईरान युद्ध को बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल देगा. अमेरिका और इजरायल के हमले के खिलाफ ईरान और रूस के बीच के मतभेदों को दूर करने की जरूरत है.
रूस का समर्थन और ईरान की प्रतिक्रिया
रूस ने ईरान के समर्थन में खुलकर आते हुए कहा कि अमेरिका और इजरायल ईरान को नार्मल नहीं देख सकते हैं और ईरान पर अमेरिका-इजरायली हमले से क्षेत्र में परमाणु सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ गया है. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि यह ईरान और उसके पड़ोसी देशों को परमाणु हथियार विकसित करने के लिए प्रेरित कर सकता है. ईरान युद्ध को बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल देगा, यह भी कहा है. रूस ने कहा कि ईरान पर अमेरिका-इजरायली हमले से क्षेत्र में परमाणु सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि यह ईरान और उसके पड़ोसी देशों को परमाणु हथियार विकसित करने के लिए प्रेरित कर सकता है. ईरान के विदेश मंत्री जavad Zarif ने अमेरिका के खिलाफ ईरान के प्रति नाराजगी व्यक्त की है और कहा है कि ईरान को अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के लिए किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करना है. अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार है लेकिन ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू करना होगा.
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत
युद्ध के 31वें दिन ईरान ने अमेरिका और इजरायल के ठिकानों पर जमकर बमबारी की. इस हमले में, ईरान ने कहा कि अगर अमेरिकी सैनिक उनकी जमीन पर उतरे तो वह वापस नहीं जाएंगे. इस हमले के बाद, रूस ने कहा कि ईरान पर अमेरिका-इजरायली हमले से क्षेत्र में परमाणु सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि यह ईरान और उसके पड़ोसी देशों को परमाणु हथियार विकसित करने के लिए प्रेरित कर सकता है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि ईरान युद्ध को बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल देगा. अमेरिका और इजरायल के हमले के खिलाफ ईरान और रूस के बीच के मतभेदों को दूर करने की जरूरत है.
ईरान का जवाब
ईरान के विदेश मंत्री जavad Zarif ने अमेरिका के खिलाफ ईरान के प्रति नाराजगी व्यक्त की है और कहा है कि ईरान को अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के लिए किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करना है. अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार है लेकिन ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू करना होगा.
अंतिम कारण
बात यह है कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत के लिए अभी भी कई चीजें हैं जिन पर संवाद होना है. अमेरिका की नीतियों से ईरान का नाराजगी है और अमेरिका को ईरान के परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के लिए कहा है. लेकिन ईरान को लगता है कि अमेरिका की नीतियों से ईरान को खतरा है, इसलिए वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के लिए किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करने वाला है.
