ईरान की मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करने की क्षमता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करने की क्षमता काफी कम हो गई है और उनके हथियार कारखाने और लॉन्चर पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं. लेकिन खुफिया रिपोर्ट इस दावे को पूरी तरह सही नहीं मानती. सूत्रों के अनुसार, ईरान के कई मिसाइल लॉन्चर और ड्रोन अभी भी सक्रिय हैं. इसके अलावा, ईरान की अंडरग्राउंड टनल और मोबाइल लॉन्च सिस्टम उन्हें अब भी मजबूत बनाए हुए हैं.
ईरान ने लंबे समय से अपने मिसाइल लॉन्चरों को भूमिगत टनल और गुफाओं में छिपाकर रखा है. इसी वजह से अमेरिका और इज़राइल के लिए इन्हें निशाना बनाना मुश्किल हो गया है. मोबाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म्स भी ईरान की ताकत को बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. अमेरिका ने टनल के प्रवेश द्वार और भारी मशीनरी को निशाना बनाकर उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की कोस्टल क्रूज मिसाइलें और कुछ ड्रोन अब भी खतरनाक बने हुए हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खतरा
ईरानी नौसेना को काफी नुकसान हुआ है, लेकिन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की छोटी नौकाएं और बिना चालक वाले सतही जहाज अब भी मौजूद हैं. इनका इस्तेमाल स्ट्रेट ऑफ होरमज में जहाजों पर हमले के लिए किया जा सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है. सूत्रों का कहना है कि ईरान की बची हुई ताकत अभी भी अमेरिका और इज़राइल के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है.
पेंटागन के अनुसार, ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले काफी कम हो गए हैं और अमेरिकी सेना को एयर डॉमिनेंस हासिल है. लेकिन खुफिया सूत्रों का कहना है कि ईरान अभी भी अपने मिसाइल और ड्रोन प्लेटफॉर्म्स के जरिए हमला करने की क्षमता रखता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह सुरक्षित करना अभी भी चुनौतीपूर्ण है और ईरान की कोस्टल मिसाइलें और भूमिगत सुविधाएं अभी भी खतरा पैदा कर सकती हैं.
अमेरिका और इज़राइल के हमले का असर
अमेरिका और इज़राइल ने अब तक ईरान की कई सैन्य सुविधाओं और नेताओं को निशाना बनाया है. इनमें सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख अली लारिज़ानी भी शामिल बताए जा रहे हैं. हालांकि अमेरिकी मीडिया में कहा गया कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले कम हुए हैं, लेकिन ये ताकतें अभी भी पूरी तरह नष्ट नहीं हुई हैं. मिसाइल लॉन्चरों की संख्या जरूर घटी है, लेकिन कुछ लॉन्चर अभी भी भूमिगत या सुरक्षित जगहों पर मौजूद हैं, जिससे उन्हें पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं है.
इसके अलावा, ईरान की सैन्य ताकत को कुछ हद तक कमजोर जरूर किया गया है, लेकिन कई मिसाइल, लॉन्चर और तटीय क्रूज मिसाइलें अब भी बरकरार हैं. ये मिसाइलें खासकर स्ट्रेट ऑफ होरमज में जहाजों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकती हैं. बताया जा रहा है कि अमेरिका अब तक 12,300 से ज्यादा टारगेट पर हमले कर चुका है और कई बड़े ईरानी नेताओं को मार गिराने का दावा किया गया है.
इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य ताकत अभी भी बरकरार है. ईरान की मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करने की क्षमता कम हुई है, लेकिन वह अभी भी हमला करने की क्षमता रखता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खतरा अभी भी बना हुआ है, और अमेरिका और इज़राइल को इस क्षेत्र में सावधानी से काम करना होगा.
इस खुफिया रिपोर्ट ने एक बार फिर से अमेरिका और इज़राइल के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह दर्शाया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है.
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका और इज़राइल को ईरान के साथ संवाद बढ़ाने और शांतिपूर्ण समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए. यह केवल अमेरिका और इज़राइल के हित में नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए भी यह महत्वपूर्ण है.
इसलिए, अमेरिका और इज़राइल को अपने दावों को वास्तविकता के साथ मिलाना चाहिए और ईरान के साथ संवाद बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए. यही एकमात्र तरीका है जिससे पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बहाल की जा सकती है.
