युद्ध की आग में ख़ुद फंसते जा रहे खाड़ी देश – ईरानी जवाबी हमले ने क्या बदल दिया

ाड़ी देशों के लिए युद्ध की आग में फंसते जा रहे हैं, जिसका कारण अमेरिका-इसराइल के हमले हैं और ईरान की जवाबी कार्रवाई है. दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी उत्पादन फ़ील्ड साउथ पार्स धुएं के काले बादलों से ढक गया है, जिसका अर्थ है कि दुनिया का ऊर्जा संकट और गहरा हो गया है.

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ईरान के जवाबी हमले और खाड़ी देशों की स्थिति

बुधवार को ईरान ने अपने गैस फ़ील्ड पर हमलों के बाद खाड़ी देशों के तेल और गैस ठिकानों पर हमलों की चेतावनी दी और देर शाम मिसाइल हमले कर दिए. इस हमले में तेल प्रोसेसिंग यूनिट रास लाफ़ान में भारी नुक़सान हुआ है.

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पर ईरान के हमले

सऊदी अरब ने राजधानी रियाद के ऊपर चार बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने का दावा किया है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात पर भी ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए हैं. इस हमले में संयुक्त अरब अमीरात के शाह गैस फ़ील्ड पर भी हमले हुए हैं और फुजैराह बंदरगाह को भी निशाना बनाया गया है.

युद्ध की आग में फंसते जा रहे खाड़ी देश

अब ये देश ख़ुद इस युद्ध की चपेट में आ गए हैं और उनके पास विकल्प बहुत सीमित हैं. ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, क़तर, कुवैत, बहरीन और सऊदी अरब पर हमले किए हैं, जिसका अर्थ है कि ये देश युद्ध की आग में फंसते जा रहे हैं.

युद्ध का असर दुनिया भर में दिखाई दे रहा है

युद्ध के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल के दाम पांच प्रतिशत तक बढ़ गए हैं और यह संकट और गहरा होता जा रहा है. इस संकट के कारण दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं और इसका असर सीधे आम आदमी पर पड़ेगा.

अब देखना होगा कि खाड़ी देश कैसे इस संकट से निपटते हैं और क्या वे अपनी स्थिति सुधारने के लिए किसी भी तरह के समझौते पर होंगे.

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