पेट्रोल-डीजल सुरक्षित, लेकिन LPG गैस की किल्लत क्यों बढ़ गई? जानें इसकी पूरी इनसाइड स्टोरी

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मध्य पूर्व युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच भारत में एलपीजी गैस की कमी गहरा गई है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी हुई हैं। आइए जानते हैं कि पेट्रोल-डीजल सुरक्षित होने के बावजूद रसोई गैस की इतनी किल्लत क्यों हो रही है।

हॉर्मुज स्ट्रेट क्या है और इसका महत्व?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जो दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देशों के लिए एक चोकपॉइंट है। यहां से रोजाना लगभग 20% ग्लोबल ऑयल और गैस की आपूर्ति होती है। इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट आने पर दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं। होर्मुज स्ट्रेट का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि यहाँ से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या बहुत अधिक होती है, जो विश्व की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

होर्मुज स्ट्रेट के महत्व को और भी समझने के लिए, हमें यह जानना होगा कि यह जलमार्ग किन देशों के लिए महत्वपूर्ण है। सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश अपने तेल निर्यात के लिए इस जलमार्ग पर भरोसा करते हैं। इसके अलावा, यह मार्ग चीन, भारत, और जापान जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस मार्ग से तेल आयात करते हैं।

एलपीजी पर क्यों पड़ा पहले असर?
भारत हर साल 3.1 करोड़ टन से अधिक एलपीजी की खपत करता है, लेकिन घरेलू उत्पादन इस मांग को पूरा नहीं कर पाता है। बाकी की जरूरतें खाड़ी देशों से आयात करके पूरी की जाती हैं। एलपीजी ले जाने वाले टैंकरों को भारत पहुंचने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरना पड़ता है, जो एलपीजी की आपूर्ति में रुकावट का मुख्य कारण है। इसके अलावा, एलपीजी की मांग में सीजनल उतार-चढ़ाव भी एक महत्वपूर्ण कारक है, जो आपूर्ति में बदलाव को प्रभावित करता है।

एलपीजी की आपूर्ति में होर्मुज स्ट्रेट की भूमिका को और भी समझने के लिए, हमें यह जानना होगा कि यह मार्ग कितना संवेदनशील है। होर्मуз स्ट्रेट की चौड़ाई लगभग 21 मील है, और इसकी गहराई लगभग 200 फीट है। यह मार्ग इतना संकरा और गहरा है कि तेल टैंकरों को यहाँ से गुजरने में काफी समय लगता है, और यहाँ किसी भी तरह की रुकावट आने पर तेल आपूर्ति में तुरंत प्रभाव पड़ता है।

हाल ही में, भारत ने अमेरिका से 30 मिलियन बैरल रूसी क्रूड ऑयल खरीदा है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर से आयात किया जाता है। इसके अलावा, भारत के पास घरेलू मांग की तुलना में अधिक रिफाइनिंग क्षमता है, जो आपूर्ति में बदलाव होने पर लचीलापन प्रदान करती है। यह कदम भारत को होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है, और एलपीजी की आपूर्ति में स्थिरता लाने में सहायक हो सकता है।

क्यों नहीं हुई पेट्रोल-डीजल की किल्लत?
पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें रूस सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। रूसी कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा उन मार्गों से भारत पहुंचता है जो होर्मुज से नहीं गुजरते। इसके अलावा, अमेरिका, भारत, चीन और कई यूरोपीय देशों के पास कच्चे तेल का विशाल आपातकालीन भंडार है, जो होर्मुज में रुकावट आने पर महीनों तक आपूर्ति को बनाए रखने में मदद करता है। यह आपातकालीन भंडार देशों को तेल की कीमतों में अस्थिरता से निपटने में मदद करता है, और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देता है।

इसके अलावा, पेट्रोल और डीजल की मांग में एलपीजी की तुलना में कम सीजनल उतार-चढ़ाव होता है, जो आपूर्ति में बदलाव को कम प्रभावित करता है। इसके अलावा, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति में होर्मुज स्ट्रेट की भूमिका एलपीजी की तुलना में कम है, जो इसे कम संवेदनशील बनाता है। यह कारण पेट्रोल और डीजल की किल्लत को कम करते हैं, और ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता को बढ़ावा देते हैं।

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव और मध्य पूर्व युद्ध के कारण एलपीजी की आपूर्ति में रुकावट आई है, जो भारत में एलपीजी की कमी का कारण बना है। भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों से कच्चा तेल आयात करना पड़ता है, जो होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता को कम करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, भारत को अपनी रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ाने और आपातकालीन भंडार को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए, जो ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देगा और एलपीजी की आपूर्ति में स्थिरता लाएगा।

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