इस्लामाबाद में तनावपूर्ण माहौल
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण वार्ता का आयोजन किया गया है। इस बैठक के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल पहुंच चुके हैं, लेकिन ईरान के कड़े रुख ने पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिया है। ईरान की तरफ से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ कर रहे हैं, जो अपनी टीम के साथ इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात के दौरान भी अपने देश का रुख स्पष्ट करने की तैयारी कर ली है।
क्या हैं ईरान की दो प्रमुख शर्तें?
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह बातचीत की मेज पर तभी आएगा जब अमेरिका उसकी दो प्रमुख शर्तों को स्वीकार कर लेगा। ये शर्तें इस प्रकार हैं:
- लेबनान और इजरायल के बीच तत्काल और पूर्ण युद्धविराम (सीजफायर) लागू किया जाए।
- विभिन्न देशों में ईरान की जब्त की गई (फ्रीज) संपत्तियों को तुरंत जारी किया जाए।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने साफ कहा है कि इन शर्तों के पूरा हुए बिना आगे किसी भी तरह की बातचीत का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा और वे इसमें शामिल नहीं होंगे।
‘हमें अमेरिका पर बिलकुल भरोसा नहीं’
इस्लामाबाद पहुंचने के बाद ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने मीडिया से बातचीत में अमेरिका के प्रति गहरा अविश्वास व्यक्त किया। बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के अनुसार, गालिबाफ ने कहा, “हमारी मंशा अच्छी है, लेकिन हमें अमेरिका पर भरोसा नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि अतीत में हुई वार्ताओं में ईरान ने हमेशा अच्छी नीयत दिखाई, लेकिन इसके बावजूद उन पर हमले किए गए और युद्ध जैसी परिस्थितियां पैदा की गईं। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत की आड़ में ईरान के खिलाफ कार्रवाई की गई और युद्ध अपराध तक हुए।
धोखेबाजी का मिलेगा कड़ा जवाब
गालिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वह वास्तव में एक स्थायी समझौता चाहता है और ईरान के अधिकारों को मान्यता देता है, तो ईरान भी इसके लिए पूरी तरह से तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा, “लेकिन अगर यह बातचीत सिर्फ अपनी ताकत का प्रदर्शन करने या धोखे की किसी रणनीति का हिस्सा है, तो ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार रहेगा।” उन्होंने हाल के संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान की जवाबी कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और सुरक्षा व्यवस्था
इस अहम बैठक के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी इस्लामाबाद पहुंच चुका है। इसका नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। इस उच्च-स्तरीय बैठक और दोनों देशों के बीच तनाव को देखते हुए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
