होर्मुज में अमेरिकी सेना का विशाल अभियान
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि 11 अप्रैल, 2026 को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी सेनाओं ने बारूदी सुरंगों को हटाने का अभियान शुरू कर दिया है। इस कार्रवाई में अमेरिकी नौसेना के दो शक्तिशाली गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन (DDG121) और यूएसएस माइकल मर्फी (DDG 112) शामिल हैं। इन जंगी जहाजों ने अरब की खाड़ी में प्रवेश किया और ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों से इस क्षेत्र को साफ करने का काम शुरू किया है। इस ऑपरेशन का प्राथमिक लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और व्यापारिक आवागमन के लिए एक सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करना है, जो क्षेत्र की आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अभियान का उद्देश्य और रणनीतिक महत्व
CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कपूर ने इस अभियान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि, “हमने एक नया रास्ता बनाने की प्रक्रिया शुरू की है।” उन्होंने बताया कि इस सुरक्षित मार्ग को जल्द ही वैश्विक समुद्री उद्योग के साथ साझा किया जाएगा, ताकि व्यापारिक आवागमन बिना किसी बाधा के जारी रह सके। एडमिरल कपूर ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग और एक आवश्यक व्यापारिक गलियारा बताया, जो क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक समृद्धि में सीधा योगदान देता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आने वाले दिनों में पानी के नीचे चलने वाले ड्रोनों सहित अतिरिक्त अमेरिकी सैन्य इकाइयाँ इस व्यापक अभियान में शामिल होंगी, जिससे बारूदी सुरंग हटाने की क्षमता और प्रभावशीलता में वृद्धि होगी। यह रणनीतिक कदम क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और मुक्त व्यापार के सिद्धांतों को बनाए रखने की अमेरिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पाकिस्तान में जारी शांति वार्ता और उसका संदर्भ
एक तरफ होर्मुज में अमेरिकी सेना अपना सैन्य अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच शांति वार्ता चल रही है। यह वार्ता, जो पांच घंटे से अधिक समय से जारी है, अभी तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है। दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों के इतिहास को देखते हुए, यह शांति वार्ता अत्यंत संवेदनशील मानी जा रही है। सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीतिक प्रयास यह दर्शाते हैं कि अमेरिका क्षेत्र में अपनी सुरक्षा चिंताओं को दूर करने और संभावित सैन्य संघर्ष को टालने दोनों के लिए सक्रिय है। इन वार्ताओं का लक्ष्य दोनों पक्षों के बीच मतभेदों को सुलझाना और एक स्थिर क्षेत्रीय वातावरण तैयार करना है, जबकि सैन्य अभियान क्षेत्र में अमेरिका के रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए एक निवारक के रूप में कार्य करता है।
ट्रंप का बयान: ईरान की सैन्य क्षमता पर टिप्पणियां
पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमताओं के बारे में पहले भी बयान दिए थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि “उनकी नौसेना खत्म हो चुकी है। उनकी वायु सेना खत्म हो चुकी है।” उन्होंने आगे दावा किया था कि ईरान का एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम लगभग ‘नहीं के बराबर’ है, उनके रडार बंद हो चुके हैं, और उनकी मिसाइल व ड्रोन फैक्ट्रियां काफी हद तक नष्ट कर दी गई हैं। ट्रंप ने यह भी बताया था कि ईरान के “ऊंचे कद के नेता अब इस दुनिया में नहीं हैं।” इन टिप्पणियों का उद्देश्य ईरान की सैन्य शक्ति को कम आंकना और उसके क्षेत्रीय प्रभाव को चुनौती देना था। उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि ईरान के पास केवल “एक ही चीज बची है” – समुद्री बारूदी सुरंगें, और दावा किया कि उसकी सभी 28 माइन बिछाने वाली नौकाएं भी “समुद्र की तह में पड़ी हैं।” ये बयान मौजूदा होर्मुज ऑपरेशन के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे अमेरिका की इस धारणा को रेखांकित करते हैं कि ईरान की एकमात्र शेष सामरिक खतरा उसकी समुद्री बारूदी सुरंगें हो सकती हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक गलियारे का भविष्य
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संचालन वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया का लगभग एक-तिहाई तरल प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल का लगभग 20% दैनिक रूप से इस जलमार्ग से गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या बाधा वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। अमेरिकी सेना का बारूदी सुरंग हटाने का ऑपरेशन न केवल समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि यह ईरान को भविष्य में समुद्री व्यापार को बाधित करने से रोकने का भी प्रयास है। इस्लामाबाद में चल रही शांति वार्ता इस सैन्य अभियान के साथ एक नाजुक संतुलन बनाती है, जिसमें कूटनीति के माध्यम से स्थायी समाधान खोजने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये दोनों देश सैन्य दबाव और कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर किसी साझा समझौते पर पहुँच पाते हैं, और होर्मुज का महत्वपूर्ण जलमार्ग वैश्विक व्यापार के लिए पूरी तरह से सुरक्षित रहता है या नहीं।
