ट्रंप के विवादित पोस्ट से मचा बवाल
ईरान के साथ बढ़ते तनाव और होर्मुज़ स्ट्रेट के मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक विवादित पोस्ट किया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान के लिए अपशब्दों का प्रयोग करते हुए धमकी दी कि वह तुरंत होर्मुज़ स्ट्रेट को खोल दे, अन्यथा उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उनके इस बयान के बाद अमेरिका समेत दुनियाभर में उनकी कड़ी आलोचना हो रही है। कई नेताओं ने ईरान के लिए इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर आपत्ति जताई है।
अमेरिकी नेताओं और ईरान की तीखी प्रतिक्रिया
ट्रंप के इस पोस्ट के बाद अमेरिका में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। न्यूयॉर्क से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद चक शुमर ने उनकी तीखी आलोचना की है। शुमर ने सोशल मीडिया पर ईस्टर की शुभकामनाएं देते हुए लिखा, “जब आप चर्च जा रहे हैं, अपने दोस्तों और परिवार के साथ जश्न मना रहे हैं, तब अमेरिका के राष्ट्रपति सोशल मीडिया पर एक बेकाबू पागल की तरह बड़बड़ा रहे हैं।”
शुमर ने आगे कहा, “वह संभावित युद्ध अपराधों की धमकी दे रहे हैं और अपने सहयोगियों को नाराज़ कर रहे हैं। वह (ट्रंप) ऐसे ही हैं, लेकिन हम ऐसे नहीं हैं। हमारा देश इससे कहीं बेहतर का हक़दार है।”
वहीं, थाईलैंड में ईरान के दूतावास ने ट्रंप के पोस्ट पर पलटवार करते हुए लिखा, “अमेरिकी राष्ट्रपति जिस तरह से किशोरों की तरह गालियाँ देते हैं, उसे देखकर ऐसा लगता है कि अमेरिका उम्मीद से कहीं पहले ही पाषाण युग में पहुँच गया है।”
समर्थन और विरोध के सुर
हालांकि, कुछ नेताओं ने ट्रंप का समर्थन भी किया है। सिनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप का पक्ष लेते हुए लिखा, “जैसा कि मैं पिछले कई दिनों से कहता आ रहा हूँ, राष्ट्रपति ट्रंप होर्मुज़ स्ट्रेट को बहाल करने पर पूरी तरह से लगे हुए हैं। ईरान को दिए गए अल्टीमेटम के मामले में वे बेहद गंभीर हैं।” ग्राहम ने आगे कहा कि कूटनीति का अवसर हाथ से निकलता जा रहा है और ईरान को समझदारी से फैसला लेना चाहिए।
दूसरी ओर, अमेरिकी कांग्रेस की पूर्व सदस्य मार्जोरी टेलर ने ट्रंप की कड़ी निंदा की। उन्होंने लिखा, “ईस्टर की सुबह, राष्ट्रपति ट्रंप ने यह पोस्ट किया। उनके प्रशासन में जो भी ख़ुद को ईसाई कहता है, उसे घुटनों पर बैठकर ईश्वर से माफ़ी माँगनी चाहिए। उन्हें राष्ट्रपति की पूजा करना बंद करना चाहिए और ट्रंप के पागलपन में दखल देना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट इसलिए बंद है क्योंकि अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ बिना उकसावे वाला युद्ध शुरू किया है।
भारत और पाकिस्तान से भी उठीं आवाजें
ट्रंप के बयान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। पाकिस्तान में ईरान के दूतावास ने लिखा, “डोनाल्ड ट्रंप को उनके असंतुलित व्यवहार और उच्च-स्तरीय सरकारी पदों को संभालने में उनकी अक्षमता के कारण महाभियोग चलाकर पद से हटा दिया जाना चाहिए।”
इस मामले पर भारत से भी प्रतिक्रिया आई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “प्रिय अमेरिकी लोगों, आप लोगों ने अपने साथ यह क्या कर लिया है? क्या इस तरह का कोई बयान सचमुच आपको रास आता है?”
मनोज झा ने आगे कहा, “जब ईरान और होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर बयानबाज़ी महज़ एक तमाशा बनकर रह जाती है, तो यह ताक़त नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी से चुपचाप पल्ला झाड़ने को दिखाती है। राजनीति, अपने बेहतरीन रूप में, एक नैतिक संवाद है। सवाल इस बारे में है कि एक लोकतंत्र किसे अपनाता है और अंत में किसे सामान्य मानने का चुनाव करता है।”
लगातार बदलते बयान और डेडलाइन का खेल
ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से राष्ट्रपति ट्रंप कई बार अपने बयान बदल चुके हैं। होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलने के लिए उनकी धमकियों और समय-सीमा में लगातार बदलाव देखा गया है, जिससे उनकी रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं।
- डेडलाइन 1: 21 मार्च को ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान ने 48 घंटों के अंदर होर्मुज़ स्ट्रेट नहीं खोला, तो वह बिजली संयंत्रों पर “हमला करके उन्हें पूरी तरह तबाह कर देंगे”।
- डेडलाइन 2: दो दिन बाद, उन्होंने हमलों को पाँच दिनों के लिए टाल दिया और दावा किया कि दोनों देशों के बीच “बहुत अच्छी बातचीत” हुई है।
- डेडलाइन 3: 27 मार्च को ट्रंप ने यह कहकर हमला 10 दिनों के लिए टाल दिया कि ‘ईरानी सरकार ने इसका अनुरोध किया था’। इससे उनकी डेडलाइन 6 अप्रैल हो गई।
- 48 घंटे की चेतावनी: 6 अप्रैल की डेडलाइन नजदीक आने पर, उन्होंने ईरान को “48 घंटे” की चेतावनी दी और “कहर बरपाने” की धमकी दी।
- ताज़ा धमकी: रविवार को उन्होंने एक बार फिर आपत्तिजनक भाषा के साथ अपनी धमकी दोहराई।
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने दी ट्रंप को सलाह
डोनाल्ड ट्रंप की लगातार बदलती बयानबाजी पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी उन्हें संयम बरतने की सलाह दी है। इसी हफ्ते मैक्रों ने ट्रंप के रवैये की आलोचना करते हुए कहा था, “गंभीर बनें… रोज़-रोज़ न बोलें।”
दक्षिण कोरिया की यात्रा के दौरान मैक्रों ने पत्रकारों से कहा, “यह कोई तमाशा नहीं है। हम युद्ध और शांति और लोगों की ज़िंदगी के बारे में बात कर रहे हैं। जब आप गंभीर होना चाहते हैं, तो आप रोज़-रोज़ वह बात नहीं कहते, जो आपने एक दिन पहले कही थी।” उनका यह बयान स्पष्ट रूप से ट्रंप की विरोधाभासी टिप्पणियों की ओर एक इशारा था। यूरोपीय देश खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के कुछ अभियानों का समर्थन तो कर रहे हैं, लेकिन सीधे तौर पर युद्ध में शामिल होने से बचते रहे हैं।
