गजब! रुपये ने दी डॉलर को पटखनी, 6 पैसे की मजबूती के साथ 93 पर खुला
रुपये की मजबूती के पीछे के कारण
आरबीआई का एक्शन
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने फॉरेक्स डेरिवेटिव्स मार्केट में नियमों को सख्त कर दिया है। इसके तहत बैंकों के लिए नेट ओपन पोजीशंस की लिमिट 100 मिलियन डॉलर तय कर दी गई है। इससे रुपये की कमजोरी और डॉलर की भविष्य की मांग को लेकर दांव लगाने में कमी आएगी। बैंकों के पास भारतीय रुपये (एनओपी-आईएनआर) पर बैंकों की नेट ओपन पोजीशन पर आरबीआई के निर्देश का पालन करने के लिए 10 अप्रैल तक का समय है।
मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान
कल, यानी 8 अप्रैल को रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति (मॉनेटरी पॉलिसी) का ऐलान करेगा। बाजार को उम्मीद है कि गिरते रुपये को संभालने के लिए आरबीआई कई बड़े कदम उठा सकता है, जबकि रेपो रेट घटने की गुंजाइश कम ही है।
वैश्विक कारक
दुनिया भर में निवेशक ब्रेंट क्रूड की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर सतर्क हैं क्योंकि पश्चिम एशिया में संकट का माहौल गहराता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान मंगलवार तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज – जो कई देशों के लिए एक अहम एनर्जी रूट है – को खोलने की डेडलाइन चूक जाता है, तो उसे तबाह कर दिया जाएगा। ब्रेंट क्रूड की कीमतें $111 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही हैं, जो पिछले सेशन से 1.4 परसेंट ज्यादा है। जब से युद्ध शुरू हुआ है, तेल की कीमतों में लगभग 50 परसेंट का उछाल आया है।
रुपये के लिए आगे क्या?
रुपये की मजबूती के लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। आरबीआई के एक्शन से रुपये को समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में डॉलर की कमजोरी भी रुपये के लिए सकारात्मक हो सकती है। लेकिन, पश्चिम एशिया में तनाव और तेल की बढ़ी हुई कीमतें रुपये के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
इस बीच, निवेशक 8 अप्रैल को रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के ऐलान का इंतजार कर रहे हैं। बाजार को उम्मीद है कि आरबीआई रुपये को संभालने के लिए कई बड़े कदम उठा सकता है।
रुपये की मजबूती एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसके लिए कई कारकों पर निर्भर रहना होगा। आरबीआई के एक्शन और वैश्विक बाजारों की स्थिति रुपये के लिए महत्वपूर्ण होगी। निवेशकों को 8 अप्रैल को रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के ऐलान का इंतजार करना होगा।
