पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 128% तक बढ़ गई हैं, लेकिन भारत में अभी भी राहत है

ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेज डॉट कॉम के 6 अप्रैल तक के जारी आंकड़ों के मुताबिक पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने वाले टॉप-10 देशों में म्यांमार, फिलीपींस, मलेशिया, कंबोडिया, पाकिस्तान, लाओस, जिमबाब्वे, यूएई, वियतनाम और पनामा हैं। यहां युद्ध के बाद से पेट्रोल 38.5 प्रतिशत से लेकर 93.9 प्रतिशत महंगा हुआ है। जबकि, डीजल के दाम में 38.8% से 169.5% तक का इजाफा हुआ है।

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पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल 128% तक महंगा, जानें भारत में क्यों नहीं बढ़े दाम

 म्यांमार से पाकिस्तान तक पेट्रोल-डीजल हुआ महंगा

ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेज डॉट कॉम के 6 अप्रैल तक के जारी आंकड़ों के मुताबिक पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने वाले टॉप-10 देशों में म्यांमार, फिलीपींस, मलेशिया, कंबोडिया, पाकिस्तान, लाओस, जिमबाब्वे, यूएई, वियतनाम और पनामा हैं। यहां युद्ध के बाद से पेट्रोल 38.5 प्रतिशत से लेकर 93.9 प्रतिशत महंगा हुआ है। जबकि, डीजल के दाम में 38.8% से 169.5% तक का इजाफा हुआ है।

युद्ध के बाद से पेट्रोल के दाम बढ़ाने वाले टॉप-10 देश

  1. म्यांमार 93.9%
  2. फिलीपींस 68.7%
  3. मलेशिया 52.4%
  4. कंबोडिया 49.4%
  5. पाकिस्तान 46.6%
  6. लाओस 45.6%
  7. जिमबाब्वे 42.9%
  8. यूएई 40.8%
  9. वियतनाम 39.0%
  10. पनामा 38.5%

युद्ध के बाद से डीजल के दाम बढ़ाने वाले टॉप-10 देश

  1. लाओस 169.5%
  2. वियतनाम 141.8%
  3. म्यांमार 128.5%
  4. फिलीपींस 128.0%
  5. कंबोडिया 118.7%
  6. मलेशिया 101.3%
  7. पाकिस्तान 88.7%
  8. यूएई 86.1%
  9. लेबनान 76.7%
  10. न्यूजीलैंड 76.3%

भारत क्यों है ज्यादा संवेदनशील?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़ते ही भारत की लागत भी बढ़ जाती है। हालांकि, यह असर तुरंत आम लोगों तक नहीं पहुंचता, लेकिन तेल कंपनियों और सरकार पर दबाव जरूर बढ़ने लगता है।

भारत में अभी पेट्रोल-डीजल की कीमतें क्यों नहीं बढ़ रहीं?

भारत में कीमतें इसलिए स्थिर हैं क्योंकि सरकार और सरकारी तेल कंपनियां (PSUs) अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर तुरंत पास नहीं करतीं। कई बार कंपनियां घाटा सहकर या सरकार टैक्स एडजस्ट करके कीमतों को कुछ समय तक नियंत्रित रखती है। इसके अलावा महंगाई और राजनीतिक कारण भी इस फैसले को प्रभावित करते हैं।

भारत में यह राहत कब तक?

यह स्थिरता अस्थायी होती है। अगर ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो तेल कंपनियों का घाटा बढ़ने लगता है। ऐसे में या तो सरकार टैक्स और कम करेगी या फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी।

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