दक्षिण एशिया में क्यों गहराया तेल संकट?
मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले के बाद, ईरान ने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंदी कर दी है। यह दुनिया का एक महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। इस वजह से तेल और एलपीजी से लदे जहाज फारस और ओमान की खाड़ी में फंस गए हैं। हालांकि ईरान मित्र देशों के जहाजों को धीरे-धीरे निकलने दे रहा है, लेकिन इस देरी ने आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसका सीधा असर दक्षिण एशिया पर पड़ा है, जो ऊर्जा के लिए आयात पर बहुत अधिक निर्भर है और जहां दुनिया की आबादी का पांचवां हिस्सा रहता है।
भारत ने उठाए ये महत्वपूर्ण कदम
इस संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने आम जनता पर बोझ कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार द्वारा अपनाई गई बहु-आयामी रणनीति में प्रमुख उपाय शामिल हैं:
- पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में भारी कटौती की गई है।
- विमानन ईंधन और डीजल के निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर (windfall tax) लगाया गया है, ताकि घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
- आपातकालीन उपायों के तहत, गैस की आपूर्ति गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से हटाकर प्रमुख उपयोगकर्ताओं को दी जा रही है।
- देश की सभी तेल रिफाइनरियों को रसोई गैस (एलपीजी) का उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।
पाकिस्तान का कड़ा फैसला: 4-दिन का कार्यसप्ताह
तेल संकट का पाकिस्तान की पहले से ही संघर्ष कर रही अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है, जिसके चलते सरकार को कुछ बेहद कड़े फैसले लेने पड़े हैं। ऊर्जा संरक्षण के लिए उठाए गए प्रमुख कदम ये हैं:
- सभी सरकारी विभागों के ईंधन भत्ते में दो महीने के लिए 50% की कटौती की गई है।
- सरकारी कार्यालयों में कार्य दिवस छह से घटाकर चार दिन कर दिए गए हैं।
- सभी कार्यालयों को 50% कर्मचारियों की उपस्थिति के साथ काम करने का निर्देश है, बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे।
- यहां तक कि देश की लोकप्रिय T-20 क्रिकेट लीग, पाकिस्तान सुपर लीग, के मैच भी अब बंद दरवाजों के पीछे खेले जाएंगे।
बांग्लादेश और नेपाल की प्रतिक्रिया
भारत और पाकिस्तान की तरह अन्य पड़ोसी देश भी इस संकट से जूझ रहे हैं। बांग्लादेश ने ऊर्जा की खपत को कम करने के लिए कई प्रतिबंध लागू किए हैं:
- कार्यालय और बैंक अब सात घंटे खुले रहेंगे, जबकि शॉपिंग मॉल शाम 7 बजे तक बंद हो जाएंगे।
- कार्यालयों को बिजली की खपत कम करने और अनावश्यक रोशनी से बचने का निर्देश है।
- आयोजनों में सजावटी रोशनी के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
- सरकारी कार्यालयों में ईंधन के उपयोग में कमी और सभी गैर-जरूरी यात्रा पर रोक लगा दी गई है।
वहीं, नेपाल सरकार ने भी सख्त कदम उठाए हैं:
- स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में साप्ताहिक अवकाश को एक दिन से बढ़ाकर दो दिन कर दिया गया है।
- सरकार पेट्रोल-डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने के लिए एक ‘कानूनी व्यवस्था’ पर काम कर रही है।
- आपूर्ति में बाधा से बचने के लिए विमानन ईंधन की कीमत दोगुनी से अधिक बढ़ाई गई है, साथ ही पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ाई गई हैं।
- रसोई गैस की राशनिंग लागू कर दी गई है।
श्रीलंका और मालदीव में भी हालात गंभीर
आर्थिक संकट से पहले से ही जूझ रहे श्रीलंका के लिए यह तेल संकट एक और बड़ा झटका है। सरकार ने निम्नलिखित उपाय किए हैं:
- धन की आपूर्ति बढ़ाने के उद्देश्य से बुधवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।
- ट्रेन और बस जैसी सार्वजनिक परिवहन सेवाएं कम कर दी गईं हैं।
- घरों और उद्योगों के लिए बिजली की दरें बढ़ा दी गई हैं।
मालदीव, जो पर्यटन पर बहुत अधिक निर्भर है, भी इस संकट से अछूता नहीं है। वहां की सरकार ने आपूर्ति बनाए रखने के लिए ईंधन की कीमतें बढ़ा दी हैं और वह भारत से अतिरिक्त ईंधन आपूर्ति की मांग कर रहा है।
