पूरी जानकारी
पाकिस्तान की मध्यस्थता की क्षमता
पाकिस्तान मध्य पूर्व में एक महत्वपूर्ण नेता है और उसके नेतृत्व के स्तर पर अमेरिका और ईरान दोनों से ही नज़दीकियां हैं. यही बात पाकिस्तान को एक ‘मज़बूत मध्यस्थ’ बनाती है. पाकिस्तान की मध्यस्थता की क्षमता उसके निष्पक्षता, शांति के लिए प्रयास और दोनों देशों का उस पर भरोसा दिखाती है.
ईरान का भरोसा
ईरान में पाकिस्तान के राजदूत आसिफ़ दुर्रानी ने कहा है कि ईरान और अमेरिका दोनों ही पाकिस्तान पर भरोसा करते हैं. उन्होंने कहा, “क्षेत्र में ऐसा कौन सा दूसरा देश है, जिसके ईरान से बेहतर संबंध हों? ईरान के खाड़ी देशों के साथ रिश्तों में तनाव है, तुर्की के साथ भी संबंधों में खिंचाव है. ऐसे में पाकिस्तान ही एक बेहतर मध्यस्थ बन सकता है.”
अमेरिकी भरोसा
अमेरिका भी इन वार्ताओं के लिए पाकिस्तान पर ही भरोसा करेगा. पूर्व राजदूत आसिफ़ दुर्रानी ने कहा है कि ‘भारत इन वार्ताओं में निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं बन सकता, क्योंकि मोदी ईरान पर हमले से दो दिन पहले इसराइल में थे.’
पाकिस्तान का फ़ायदा
यदि पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका-ईरान युद्ध का समाधान होता है, तो पाकिस्तान को मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का मौका मिलेगा. इससे पाकिस्तान को आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक फ़ायदे होंगे.
क्या पाकिस्तान बन सकता है गारंटर?
यह एक महत्वपूर्ण सवाल है कि क्या पाकिस्तान बन सकता है गारंटर? यदि पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका-ईरान युद्ध का समाधान होता है, तो पाकिस्तान को इस समझौते की गारंटी देने की आवश्यकता होगी. इससे पाकिस्तान को एक नई पहचान मिलेगी और वह मध्य पूर्व का एक महत्वपूर्ण नेता बनेगा.
