ईरान होर्मुज पार करने वाले जहाजों से वसूल रहा 20 लाख डॉलर; भारतीय भुगतान पर विदेश मंत्रालय का जवाब

अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के संघर्ष-विराम के बावजूद, होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के आवागमन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान कथित तौर पर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरने वाले कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर का ट्रांजिट शुल्क वसूल रहा है। इस बीच, भारत ने स्पष्ट किया है कि उसने अपने जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए ईरान को कोई शुल्क नहीं दिया है, और वह इस रास्ते से स्वतंत्र व सुरक्षित आवागमन की अपनी मांग पर कायम है।

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होर्मुज स्ट्रेट पर गहराया विवाद

अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में घोषित अस्थायी संघर्ष-विराम के बावजूद, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों के आवागमन की स्थिति अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाई है। यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार, विशेष रूप से तेल और गैस की आपूर्ति के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु है। ऐसी खबरें सामने आई हैं कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर का भारी-भरकम शुल्क वसूल रहा है। पाकिस्तान में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता में यह मुद्दा एक प्रमुख विवाद का विषय बना हुआ है, जहां दोनों देश इस संवेदनशील क्षेत्र में स्थिरता स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। भारत ने इस पूरे प्रकरण में होर्मुज स्ट्रेट से स्वतंत्र और सुरक्षित आवागमन के अपने रुख को दृढ़ता से बनाए रखा है।

ईरान द्वारा ट्रांजिट शुल्क वसूली का कारण

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य अलाएद्दीन बोरौजेर्दी ने इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) को दिए एक बयान में बताया कि होर्मुज स्ट्रेट पार करने वाले कुछ जहाजों से ट्रांजिट शुल्क के रूप में 2 मिलियन डॉलर वसूलना ईरान की शक्ति का प्रदर्शन है। उनके अनुसार, यह कदम ईरान की क्षेत्रीय संप्रभुता और समुद्री नियंत्रण को दर्शाता है। गौरतलब है कि 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमले के बाद से यह महत्वपूर्ण जलमार्ग तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ गई थी। ईरान का यह कदम वैश्विक शिपिंग समुदाय के लिए एक जटिल चुनौती पैदा कर रहा है।

भारतीय जहाजों पर शुल्क का मुद्दा और विदेश मंत्रालय का पक्ष

जब यह सवाल उठा कि क्या भारत को भी ईरान को यह शुल्क देना पड़ा है, तो भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस पर स्पष्टीकरण दिया। 9 अप्रैल, 2026 को उन्होंने बताया कि “होर्मुज स्ट्रेट पर टोल लगाए जाने की खबरें हमें भी मिली हैं। भारत इस रास्ते से जहाज के स्वतंत्र और सुरक्षित गुजरने की मांग जारी रखता है। हमने पहले भी यही बातें कही हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि “होर्मुज स्ट्रेट से जहाज गुजरने के बदले पैसे को लेकर हमारे और ईरान के बीच कोई बात नहीं हुई है।” उन्होंने इस बात से पूरी तरह इनकार किया कि केंद्र सरकार ने ईरान को ऐसा कोई भुगतान किया है। हालांकि संघर्ष-विराम से पहले भी ईरान द्वारा शुल्क वसूलने की खबरें आई थीं, ईरान ने भारत को एक ‘मित्र देश’ के रूप में इस रास्ते से आवागमन की अनुमति दी थी। इस संबंध में, भारतीय ध्वज वाले आठ एलपीजी टैंकर पहले ही इस जलमार्ग से गुजर चुके हैं।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज का महत्व

भारत अपनी तेल और गैस आपूर्ति के लिए मध्य पूर्व के देशों पर अत्यधिक निर्भर है, जिसका लगभग 90 प्रतिशत आयात इसी क्षेत्र से होता है। होर्मुज स्ट्रेट इस आयात के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ऐसे में, इस जलमार्ग पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध या अतिरिक्त शुल्क भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। प्रवक्ता जायसवाल ने कहा, “भविष्य में अगर ऐसी स्थिति बनती है तो उस समय इस पर निर्णय लिया जाएगा। हम होर्मुज स्ट्रेट से बिना किसी रोक-टोक के और सुरक्षित शिपिंग की मांग जारी रखेंगे।” यह स्पष्ट करता है कि भारत इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर स्वतंत्र और सुरक्षित नेविगेशन के अपने सिद्धांत पर दृढ़ है और भविष्य की किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार है।

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