बीच हवा में 1600 करोड़ का अमेरिकी ड्रोन गायब, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ऊपर लापता
ड्रोन की विशेषताएं और घटना का विवरण
MQ-4C ट्राइटन ड्रोन अत्याधुनिक और महंगा है, जिसकी कीमत 200 मिलियन डॉलर (लगभग 1600 करोड़ रुपये) है। यह ड्रोन लंबे समय तक आसमान में रहकर बड़े इलाके की निगरानी कर सकता है और इसे विशेष रूप से समुद्री इलाकों की निगरानी के लिए तैयार किया गया है। यह ड्रोन 50,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर उड़ सकता है और 24 घंटे से अधिक समय तक लगातार काम कर सकता है। इसकी रेंज लगभग 7,400 नॉटिकल मील है, जिससे यह बहुत दूर तक निगरानी कर सकता है।
घटना की जानकारी
- ड्रोन करीब तीन घंटे तक फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य की निगरानी करने के बाद इटली के सिगोनेला स्थित अपने बेस की ओर लौट रहा था।
- फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24 के अनुसार, अचानक ड्रोन ने अपना रास्ता थोड़ा ईरान की ओर मोड़ा और उसी दौरान 7700 कोड भेजा, जो सामान्य इमरजेंसी का संकेत होता है।
- इसके बाद ड्रोन तेजी से नीचे उतरने लगा और कुछ ही देर में रडार से गायब हो गया।
स्थिति की गंभीरता
अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ड्रोन दुर्घटनाग्रस्त हुआ या उसे मार गिराया गया। यह घटना ऐसे समय हुई है जब क्षेत्र में तनाव पहले से ही बहुत अधिक है, और इस ड्रोन के लापता होने से स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
अमेरिका-ईरान युद्ध की स्थिति
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण अमेरिका को भारी खर्च का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका हर सेकंड लगभग 10,300 डॉलर यानी लगभग 9.8 लाख रुपये खर्च कर रहा है। एक दिन में सबसे ज्यादा खर्च हथियारों और मिसाइलों पर होता है, जो लगभग 320 मिलियन डॉलर यानी लगभग 3,040 करोड़ रुपये है।
मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर खर्च
- THAAD, पैट्रियट और एजिस जैसे मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर रोज लगभग 95 मिलियन डॉलर (करीब 902 करोड़ रुपये) खर्च हो रहे हैं।
- खुफिया और साइबर ऑपरेशन पर करीब 45 मिलियन डॉलर (लगभग 427 करोड़ रुपये) और सैनिकों व अन्य व्यवस्थाओं पर करीब 30 मिलियन डॉलर (करीब 285 करोड़ रुपये) खर्च हो रहा है।
यह घटना और इसके परिणाम आने वाले दिनों में क्षेत्र की राजनीतिक और सैन्य स्थितियों को और प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के प्रयासों पर इस घटना का क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
