वार्ता से पहले ईरान की दो प्रमुख मांगें
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघे गालिबाफ ने स्पष्ट किया है कि किसी भी शांति वार्ता से पहले दो प्रमुख मुद्दों का समाधान अत्यंत आवश्यक है। पहली मांग लेबनान में तत्काल प्रभाव से युद्धविराम लागू करवाना है। दूसरी मांग यह है कि ईरान की जिन संपत्तियों को अवरुद्ध किया गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। गालिबाफ का साफ कहना है कि इन दोनों शर्तों के बिना ईरान किसी भी प्रकार की बातचीत में शामिल नहीं होगा।
ईरानी सेना की चेतावनी: बिना सीजफायर के वार्ता असंभव
ईरानी सेना के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोल्फाकरी ने एक सख्त चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि जब तक लेबनान पर हमले जारी रहेंगे, तब तक ईरान किसी भी बातचीत प्रक्रिया में भाग नहीं लेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान जल्द ही एक “बहुत विनाशकारी” सैन्य जवाबी कार्रवाई कर सकता है। यह बयान क्षेत्र में बढ़ते तनाव को दर्शाता है और आगामी कुछ घंटों को अत्यंत महत्वपूर्ण बना सकता है।
ट्रंप और नेतन्याहू को ईरानी प्रवक्ता की चेतावनी
ईरानी प्रवक्ता ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपनी हार स्वीकार कर लेनी चाहिए और ईरानी जनता व सशस्त्र बलों को धमकाना बंद करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सेनाएं आधुनिक हथियारों और प्रौद्योगिकी से लैस हैं और अमेरिका व इजरायल की सेनाओं का सामना करने तथा उन्हें परास्त करने में सक्षम हैं।
पाकिस्तान में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था
इस हाई-प्रोफाइल बैठक की मेजबानी के लिए पाकिस्तान ने व्यापक और अभूतपूर्व सुरक्षा इंतज़ाम किए हैं। गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने सुरक्षा समीक्षा करते हुए इस वार्ता को पाकिस्तान के लिए सम्मान की बात बताया। इस्लामाबाद में 10,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है, ‘रेड ज़ोन’ को पूरी तरह सील कर दिया गया है और पूरे शहर में कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
पाकिस्तान का अलर्ट मोड: मध्य पूर्व की ओर लड़ाकू विमान तैनात
इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिकी और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर उम्मीदें जगी हैं, लेकिन पाकिस्तान किसी भी जोखिम को उठाने के लिए तैयार नहीं है। मध्य पूर्व में जारी तनाव को देखते हुए, पाकिस्तान ईरान से आने वाले प्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर अत्यंत सतर्क है, खासकर इजरायल की संभावित गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए। एहतियात के तौर पर, पाकिस्तान ने अपने लड़ाकू विमान, C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, रिफ्यूलिंग टैंकर्स और AWACS को मध्य पूर्व की दिशा में तैनात कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और पाकिस्तान की भूमिका
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान का यह कदम इस्लामाबाद पर बढ़ते वैश्विक दबाव को भी दर्शाता है, क्योंकि यह हाल के वर्षों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक मानी जा रही है। इससे पहले, पाकिस्तान ने अपने सहयोगी चीन की मदद से अमेरिका-ईरान के बीच लगभग 40 दिनों से चल रहे संघर्ष को अस्थायी रूप से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसमें लगभग 2,000 लोगों की जान जा चुकी थी। अब पाकिस्तान इस संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने की दिशा में प्रयास कर रहा है।
इस्लामाबाद को अभेद किला बनाया गया
संभावित खतरों को देखते हुए, इस्लामाबाद को एक अभेद किले में तब्दील कर दिया गया है। शहर के दक्षिणी और पश्चिमी हवाई क्षेत्र में रक्षा प्रणालियों को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया गया है। पाकिस्तान इस बात को अच्छी तरह समझता है कि इस बैठक की सफलता उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि से गहराई से जुड़ी हुई है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था में कोई भी कमी नहीं छोड़ी जा रही है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस की चेतावनी
दूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने तेहरान को चेतावनी दी है कि वह अमेरिका के साथ “खेल” न खेले, क्योंकि अमेरिका युद्ध समाप्त करने के इरादे से इस्लामाबाद पहुंच रहा है। इस बीच, ईरान के पूर्व विदेश मंत्री कमाल खर्राज़ी के निधन की खबर भी चर्चा में है, जो हाल ही में हुए हवाई हमले में घायल हुए थे। वे मोहम्मद खातमी के कार्यकाल में विदेश मंत्री रहे थे और उनके परमाणु कार्यक्रम पर दिए गए बयानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ाई थी।
