भारतीय सेना में ऑफिसर्स की कमी पूरी करने के लिए एक तरफ शॉर्ट सर्विस कमिशन को ज्यादा आकर्षक बनाने पर जोर है। सेना में जवान से ऑफिसर बनने की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। अब ग्रेजुएट जवान के लिए ऑफिसर बनने के लिए डेढ़ साल की ट्रेनिंग का मौका है। इससे वे जल्दी ऑफिसर बन सकते हैं और सेना में ऑफिसर्स के खाली पद जल्दी भर सकते हैं। यह बदलाव सेना में जवान के तौर पर शामिल हुए युवाओं के लिए भी फायदेमंद है। उन्हें भी ऑफिसर बनने के लिए लिखित परीक्षा देनी होती है, फिर एसएसबी पास करनी होती है और फिर आर्मी कैडेड कॉलेज में ट्रेनिंग होती है।
भारतीय सेना में जवान के तौर पर कार्य करने के बाद ऑफिसर बनने के रास्ते
भारतीय सेना में जवान के तौर पर शामिल हुए युवा को अलग-अलग चरणों में ट्रेनिंग दी जाती है। पहले 12वीं पास और ग्रेजुएट दोनों ही जवान के लिए चार साल की ट्रेनिंग होती थी। इसमें तीन साल एसीसी और एक साल आईएमए देहरादून में ट्रेनिंग होती थी, लेकिन अब इसमें बदलाव किया गया है।
ग्रेजुएट जवान के लिए ट्रेनिंग की अवधि में बदलाव
अब ग्रेजुएट जवान को ऑफिसर बनने के लिए डेढ़ साल की ट्रेनिंग का मौका मिलेगा। इससे वे जल्दी ऑफिसर बन सकते हैं और सेना में ऑफिसर्स के खाली पद जल्दी भर सकते हैं। इस बदलाव से ग्रेजुएट जवान को भी ऑफिसर बनने का मौका मिलेगा।
सेना में ऑफिसर्स बनने के मौके भी बढ़ रहे हैं
एसीसी में जहां जवान ही जाते हैं वहीं परमानेंट कमिशन स्पेशल लिस्ट और स्पेशल कमिशन ऑफिसर के लिए ज्यादा उम्र के सैनिक भी अप्लाई कर सकते हैं। इन उम्मीदवारों के लिए एसएसबी की प्रक्रिया को भी आसान बनाया गया है।
