होर्मुज संकट: ट्रंप का गठबंधन प्रस्ताव, मित्र देशों ने किया साफ- नहीं भेजेंगे नौसेना
किस देश ने क्या कहा?
ट्रंप ने विशेष रूप से चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और यूनाइटेड किंगडम (UK) को इस संभावित गठबंधन में शामिल होने के लिए कहा है। लेकिन, अब तक किसी भी देश ने इस मुद्दे पर ट्रंप का साथ नहीं दिया है। चीन के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि बीजिंग चाहता है कि शत्रुता समाप्त हो और “सभी पक्षों की यह जिम्मेदारी है कि वे स्थिर और अबाधित ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करें।”
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कहा कि जापान की अभी मध्य पूर्व में जहाज़ों की सुरक्षा के लिए नौसेना के जहाज़ भेजने की कोई योजना नहीं है। फ्रांस ने भी पुष्टि की है कि वह अपने जहाज नहीं भेजेगा। दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया ने भी साफ कहा है कि वे होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने में मदद के लिए नौसेना नहीं भेजेंगे।
ट्रंप का बयान
ट्रंप ने कहा है कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय मिलकर इस जलमार्ग की सुरक्षा करेगा तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित होने से बचाया जा सकता है। उन्होंने खास तौर पर NATO के सदस्य देशों से इस गठबंधन में शामिल होने की अपील की, और उन्हें चेतावनी दी कि अगर उन्होंने जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में अमेरिका की मदद नहीं की, तो उन्हें “बहुत बुरे भविष्य” का सामना करना पड़ेगा।
होर्मुज संकट की स्थिति
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कब्जा दुनिया भर में तेल संकट की स्थिति बना दी है। दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है। लेकिन, ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद से इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही ठप हो चुकी है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।
होर्मुज संकट की स्थिति बहुत गंभीर है, और इसे हल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर काम करना होगा। लेकिन, ट्रंप के मित्र देशों ने इस प्रस्ताव पर साफ इनकार कर दिया है, जो इस संकट को और भी गहरा बना सकता है। अब देखना यह है कि ट्रंप और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संकट को कैसे हल करते हैं।
