दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 16 मार्च की सुबह एक बार फिर ड्रोन हमला हुआ, जिसमें एयरपोर्ट के पास एक फ्यूल टैंकर को निशाना बनाया गया और वहां भीषण आग लग गई। इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन हमले के तुरंत बाद अधिकारियों ने अगले आदेश तक हवाई यात्रा तत्काल रूप से रद्द कर दी। इस हमले के एक दिन पहले ईरान ने यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) के तीन बड़े बंदरगाहों के आस-पास के इलाकों को तुरंत खाली करने की चेतावनी दी थी, जो अमेरिका-इजरायल के साथ युद्ध में एक नई मोड़ का संकेत दे रहा है।
दुबई मीडिया ऑफिस ने एक बयान जारी कर हमले की जानकारी दी और बताया कि फ्यूल टैंकर में लगी आग पर काबू पा लिया गया है। हमले के तुरंत बाद दुबई एयरपोर्ट ने फ्लाइट्स पर पाबंदी लगा दी थी, लेकिन कुछ घंटों बाद ही एयरपोर्ट पर कुछ फ्लाइट्स को उड़ान भरने की इजाजत दी गई। दुबई मीडिया ऑफिस ने एक बयान में कहा, “दुबई सिविल एविएशन अथॉरिटी ने एहतियाती उपाय के तौर पर लागू किए गए अस्थायी निलंबन के बाद दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से और वहां के लिए चुनिंदा डेस्टिनेशन तक कुछ उड़ानों को धीरे-धीरे फिर से शुरू करने का ऐलान किया है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी फ्लाइट्स से जुड़े लेटेस्ट अपडेट्स जानने के लिए अपनी एयरलाइनों से संपर्क करें।”
यह हमला पश्चिम एशिया में अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का एक हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें अरब देशों पर कुल 2000 मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा चुके हैं। इनमें अमेरिकी डिप्लोमेटिक मिशन, मिलिट्री बेस, ऑयल फैसिलिटी, होटल, बंदरगाह और कुछ रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया है। दुबई एयरपोर्ट वेस्ट एशिया समेत दुनिया के सबसे बिजी एयरपोर्ट में से एक है, और यह हमला इसकी सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा करता है।
इस महीने दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यह तीसरा हमला था, जिसमें पहले 11 मार्च को भी ड्रोन हमला हुआ था, जिसमें 4 लोग घायल हुए थे, जिनमें एक भारतीय भी शामिल था। इसी तरह का एक और हमला 7 मार्च को हुआ था, जिसमें एयरपोर्ट के पास धुआं उठने लगा था और एक इमरजेंसी अनाउंसमेंट की गई थी। तब भी उड़ानों पर पाबंदी लगी थी, जिसे बाद में हटा दिया गया था।
